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Delhi : शरीर में जहर घोल रहे हैं अदृश्य प्रदूषक, खून के साथ मिलकर पहुंच जाते हैं शरीर के अंगों तक
Sun, 06 Nov 2022 04:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 06 Nov 2022 04:30 AM IST
सार
Delhi :यह इतने महीन हैं कि शरीर की पहली छलनी (फेफड़ों) भी इनको नहीं पकड़ पाती। नतीजतन दिल से होते हुए यह खून में घुल जाते हैं। खास बात यह कि वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से भी अभी निगरानी संभव नहीं है।
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विस्तार
दिल्ली की हवा में घुले और निगरानी केंद्रों की पकड़ में नहीं आने वाले अदृश्य प्रदूषक शरीर पर घातक वार कर रहे हैं। यह इतने महीन हैं कि शरीर की पहली छलनी (फेफड़ों) भी इनको नहीं पकड़ पाती। नतीजतन दिल से होते हुए यह खून में घुल जाते हैं। खास बात यह कि वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों से भी अभी निगरानी संभव नहीं है। इसका आकार पीएम2.5 से कम रहता है। आकलन न हो पाने से इससे बचाव के तरीकों पर खास ध्यान एजेसियों का नहीं जाता है। विशेषज्ञ इसे अदृश्य लेकिन सबसे घातक प्रदूषक मान रहे हैं।
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एम्स, दिल्ली के पल्मोनरी विभाग में वरिष्ठ डॉ. करण मदान का कहना है कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने के साथ पीएम 2.5 से पीएम1 आकार के कणों की मात्रा भी तेजी से बढ़ती है। हमारी शरीर के पास इससे बचने का कोई जैविक तरीका नहीं है। खून इनका कैरियर बन जाता है। आगे यह शरीर के अलग-अलग अंगों पर घातक असर डालते हैं। बचाव को कारगर विकल्प न होना ज्यादा खतरा पैदा कर रहा है। लंबे वक्त तक इस स्तर तक प्रदूषित हवा में रहना कई बार जानलेवा साबित हो सकता है।
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इस तरह करता है प्रभावित
सांस के साथ शरीर तक पहुंचे पीएम1.0 को फेफड़े (शरीर की पहली छन्नी) भी नहीं रोक पाते। यह फेफड़ों के रास्ते दिल तक पहुंच जाते हैं और खून में मिलकर शरीर के अन्य अंगों तक पहुंच जाती है। इन अदृश्य प्रदूषक तत्व के कारण लंग्स, हार्ट और ब्रेन में दिक्कत तो आती ही है। साथ ही यह शरीर के अन्य अंगों में भी जमा होकर उक्त अंग को फेल कर देते हैं जो काफी घातक हैं।
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प्रदूषण से बढ़ सकता है बीपी-शुगर
डॉ. मदान की माने तो यह न केवल हार्ट को नुकसान पहुंचाते हैँ, बल्कि शुगर और बीपी बढ़ने में भी इनका संबंध हो सकता है। शुगर और बीपी की समस्या बढ़ने से शरीर में अन्य रोग की हावी हो सकते हैं। साथ ही रोगों से लड़ने की क्षमता भी कमजोर हो जाती है। नेशनल लेबोरेटरी ऑफ मेडिसिन के अध्ययन की माने तो प्रदूषण के कारण रक्तचाप व ब्लड शुगर में बदलाव के संकेत मिले हैं।
कैंसर का भी खतरा
डीजल जलने से होने वाले प्रदूषण से लंग्स कैंसर होने का खतरा रहता है। प्रौढ़ व बुजुर्ग आयु वर्ग के लोग इसमें आसानी से शिकार हो सकते हैं। ऐसा उन क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई देता है जहां इसका एक्सपोजर ज्यादा है। कैंसर रिसर्च यूके का अध्ययन बताता है कि फेफड़ों के 10 कैंसरों में से एक कैंसर प्रदूषण से सकता है। प्रदूषण की तुलना में फेफड़ों के कैंसर के विकास के जोखिम में धूम्रपान अधिक प्रभाव डालता है। अध्ययन बताते हैं कि वायु प्रदूषण के कण कोशिकाओं में डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं और फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकते हैं।