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कार्रवाई न करने का आरोप: मेनका गांधी द्वारा रिस्तेदरों की संस्था को फंड आबंटित करने के मामले में सीबीआई से जवाब तलब

Tue, 21 Sep 2021 01:15 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 21 Sep 2021 01:15 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला सरकारी धन का दुरुपयोग है इसके बावजूद सीबीआई अदालत के समक्ष सही तथ्य नहीं रख रही। ऐसे में निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड तलब किया जाए। 

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delhi high court summoned cbi in case of maneka gandhi allotting funds to the institution of relatives
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री रहते मेनका गांधी ने अपने रिस्तेदारों को नियमों का उल्लंघन कर प्रदान फंड मामले में हाईकोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रभाव के चलते सीबीआई मामले की सही तरीके से जांच नहीं कर रही है और मामले को दबाने में लगी हुई है।

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न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने सीबीआई को चार सप्ताह में इस मामले में अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए सुनवाई 6 दिसंबर तय की है। अदालत ने यह निर्देश वीएम सिंह की याचिका पर दिया है।
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याची की और से पेश अधिवक्ता अर्जुन हरकोली ने अदालत को बताया कि मेनका गांधी ने मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के जरिए अपने रिस्तेदरों की संस्था गांधी ग्रामीण कल्याण ट्रस्ट को तय नियमों का उल्लंघन कर करीब 50 लाख रुपये का फंड आबंटित किया था। यह संस्था मेनका गांधी की बहन अंबिका शुक्ला व अन्य का है।
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उन्होंने कहा उनके मुवक्किल की शिकायत पर सीबीआई ने मेनका गांधी व अन्य के खिलाफ 17 अगस्त 2006 को मामला दर्ज किया। इसके बाद सीबीआई ने जांच में कोताही बरतते हुए मामले में 31 दिसंबर 2008 में क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने उसे खारिज कर सीबीआई को पुन: जांच करने का निर्देश दिया और सीबीआई ने उस फैसले के खिलाफ अपील की लेकिन उसे भी खारिज कर दिया गया।

उन्होंने कहा इसके बाद पुन: 29 मई 2015 को फिर क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी। अदालत ने पुन: क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए सीबीआई को आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए संबंधित अथॉरिटी की मंजूरी लेने का निर्देश दिया ताकि वे मामले में संज्ञान ले सके। इसके बावजूद अभी तक सीबीआई ने मंजूरी नहीं ली और मामला लटका पड़ा है। 


उन्होंने कहा कि यह मामला सरकारी धन का दुरुपयोग है इसके बावजूद सीबीआई अदालत के समक्ष सही तथ्य नहीं रख रही। ऐसे में निचली अदालत का पूरा रिकॉर्ड तलब किया जाए। इसके अलावा मुकदमें के लिए मंजूरी की जरूरत नहीं है ऐसे में ट्रायल कोर्ट को मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाए।

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