दिल्ली हाईकोर्ट: अभियोग के खिलाफ अपील के निपटारे तक शरजील ने मांगी जमानत, पुलिस से मांगा जवाब
पीठ ने कहा अपील पर सुनवाई में जमानत से अधिक समय लगेगा। जमानत और अपील पर निर्णय लेते समय अलग-अलग विचार किया जाएगा। हमने अंसल के फैसले में ऐसा कहा है और इसे सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र शरजील इमाम की जमानत याचिका पर नोटिस जारी कर पुलिस से जवाब मांगा है। शरजील ने विशेष अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उसे जमानत देने से इनकार कर दिया था। उस पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत देशद्रोह इत्यादि के आरोप हैं।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति एके मेंदीरत्ता की पीठ ने पुलिस को दो सप्ताह में अपना पक्ष रखने का समय दिया है। अदालत ने पुलिस को संबंधित रिकार्ड भी पेश करने का निर्देश दिया है। इमाम की ओर से पेश अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने पीठ को बताया कि उनके मुवक्किल पर तय अभियोग के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई में समय लगेगा। ऐसे में अपील के निपटारे तक जमानत प्रदान की जाए। वहीं दायर जमानत याचिका में नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका है।
पीठ ने कहा अपील पर सुनवाई में जमानत से अधिक समय लगेगा। जमानत और अपील पर निर्णय लेते समय अलग-अलग विचार किया जाएगा। हमने अंसल के फैसले में ऐसा कहा है और इसे सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा है। विशेष लोक अभियोजक ने तब दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर रखने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने अनुमति दी थी। मामले की सुनवाई 26 मई को होगी।
इमाम ने दिल्ली में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और नागर राष्ट्रीय रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में दिए गए कथित भड़काऊ भाषण से संबंधित एक मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। विशेष अदालत ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 124ए के साथ-साथ धारा 152ए (धर्म आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) व अन्य धाराओं के तहत खिलाफ आरोप तय किए गए है।