दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई फटकार: पारिवारिक न्यायालयों से ऐसा कार्य की अपेक्षा कि यदि संभव हो तो दोनों पक्षों के बीच समझौता हो सके
पीठ ने पटियाला हाउस अदालत स्थित प्रधान न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना के तलाक संबंधी फैसले को रद्द करते हुए कहा कि हम उनके द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण से निराश हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायालय का प्रयास न्याय के कारण का त्याग करने की कीमत पर एक तरह से या किसी अन्य मामलों को निपटाने के लिए नहीं हो सकता।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने तलाक की याचिका को खारिज करने के रवैये को लेकर एक पारिवारिक अदालत के न्यायाधीश को फटकार लगाई है। अदालत ने संबंधित जज के रवैये पर निराशा जताते हुए कहा कि पारिवारिक न्यायालयों से ऐसा कार्य करने की अपेक्षा की जाती है कि यदि संभव हो तो दोनों पक्षों के बीच समझौता हो सके। अदालत का प्रयास केवल मामलों को निपटाने का नहीं हो सकता। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि पारिवारिक अदालत के आचरण का तरीका बहुत खराब प्रक्रिया दर्शाता है।
पीठ ने पटियाला हाउस अदालत स्थित प्रधान न्यायाधीश अंजू बजाज चांदना के तलाक संबंधी फैसले को रद्द करते हुए कहा कि हम उनके द्वारा अपनाए गए दृष्टिकोण से निराश हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायालय का प्रयास न्याय के कारण का त्याग करने की कीमत पर एक तरह से या किसी अन्य मामलों को निपटाने के लिए नहीं हो सकता। परिवार न्यायालयों से अपेक्षा की जाती है कि वे इस प्रकार कार्य करें ताकि यदि संभव हो तो समझौता किया जा सके। इस मामले में चूंकि पक्षकार स्वयं उनके द्वारा बातचीत में होने के कारण स्थगन की मांग कर रहे थे, इसलिए फैमिली कोर्ट के पास उसके समक्ष किए गए स्थगन के अनुरोध को अस्वीकार करने का कोई औचित्य नहीं है।
अपीलकर्ता सबूत नहीं कर पाया पेश तो खारिज कर दी याचिका
हाईकोर्ट ने कहा कि आक्षेपित आदेश उस तरीके को बहुत खराब तरीके से दर्शाता है जिस तरह से फैमिली कोर्ट ने खुद को संचालित किया है। हाईकोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि फैमिली कोर्ट ने यह देखते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि अपीलकर्ता सबूत पेश करने में विफल रहा है। याचिकाकर्ता पति के वकील ने पीठ को बताया कि दोनों पक्ष समझौते पर बातचीत कर रहे थे जिसके लिए परिवार अदालत से बार-बार समय मांगा गया था। इस कारण साक्ष्य के रूप में हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है।
वहीं पत्नी के वकील ने भी उनके तर्क का समर्थन करते हुए कहा कि दोनों पक्ष समझोते के लिए बातचीत कर रहे है और अपीलकर्ता द्वारा बताई गई स्थिति सही है। पीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैमिली कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए दोनों पक्षों को मध्यस्थता से मामले को निपटाने की छूट प्रदान कर दी।