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दिल्ली: प्रदर्शन में पुलिस के लिए बॉडी कैमरा अनिवार्य करने के निर्देश देने से इनकार, केंद्र को दिया ये निर्देश
Wed, 07 Oct 2026 03:50 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Wed, 07 Oct 2026 03:50 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस और आरएएफ के कर्मियों के लिए बॉडी कैमरा अनिवार्य करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस जनहित याचिका पर छह महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के कर्मियों को विरोध प्रदर्शनों तथा भीड़ नियंत्रण के दौरान बॉडी वॉर्न कैमरा अनिवार्य रूप से पहनने का निर्देश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने केंद्र सरकार को इस जनहित याचिका को प्रतिनिधित्व के रूप में मानते हुए छह महीने के भीतर निर्णय लेने को कहा।
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हाईकोर्ट में दायर की गई थी याचिका
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस अरुण भारद्वाज की खंडपीठ ने वकील चाहत राघव द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में भीड़ नियंत्रण और प्रदर्शन प्रबंधन के लिए तैनात पुलिस तथा आरएएफ कर्मियों के लिए बॉडी कैमरा को अनिवार्य और हमेशा चालू रखने के साथ फुटेज के भंडारण, सुरक्षा तथा साक्ष्य के रूप में उपयोग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने की मांग की गई थी।
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कोर्ट का केंद्र को निर्देश
अदालत ने कहा कि बॉडी कैमरों के उपयोग को पहले से जारी निविदाओं और यातायात पुलिस द्वारा उनके इस्तेमाल से समझा जा सकता है। हालांकि एसओपी के अस्तित्व के बारे में जानकारी नहीं है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा द्वारा दिए गए बयान को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ने केंद्र को छह महीने के भीतर एसओपी तैयार करने पर निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ता को देने का निर्देश दिया। अगर सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत जा सकते हैं।
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यह याचिका जुलाई 2026 में जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से जुड़े प्रदर्शनों के बाद दायर की गई थी, जिसमें पुलिस द्वारा बल प्रयोग और अन्य आरोप-प्रत्यारोप लगे थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल दिल्ली पुलिस तक सीमित नहीं बल्कि समग्र पुलिस व्यवस्था से जुड़ा है और इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।