दिल्ली हाईकोर्ट: पोंजी बाइकबोट घोटाले के एक आरोपी तरुण कुमार को जमानत मिली, करोड़ों रुपये का हुआ था गबन
न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने आरोपी तरुण कुमार को जमानत प्रदान करते हुए कहा कि रिकॉर्ड की सामग्री से यह स्पष्ट है कि आरोपी ने पोंजी बाइकबोट योजना के संबंध में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई है।
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उच्च न्यायालय ने मंगलवार को नोएडा में हुए करोड़ों रुपये के पोंजी बाइकबोट घोटाले के एक आरोपी कंपनी के सीईओ और प्रबंध निदेशक (एमडी) तरुण कुमार को जमानत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा उसने आरोपी कंपनी- मैसर्स गारविट इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड के दिन-प्रतिदिन के मामलों में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई है।
न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर ने आरोपी तरुण कुमार को जमानत प्रदान करते हुए कहा कि रिकॉर्ड की सामग्री से यह स्पष्ट है कि आरोपी ने पोंजी बाइकबोट योजना के संबंध में कोई सक्रिय भूमिका नहीं निभाई है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता के उक्त कंपनी में रोजगार के दौरान भी उसने कंपनी के दिन-प्रतिदिन के मामलों में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई।
अदालत ने कहा इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। मुकदमे को समाप्त होने में लंबा समय लगेगा और उसे जेल में बंद रखने से कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता से कोई वसूली नहीं की जानी है और अब उसकी जांच के लिए जरूरत नहीं है। अदालत ने आरोपी की जमानत 50 हजार रुपये के निजी मुचलके व एक अन्य जमानत राशि पर मंजूर की है।
इस योजना से फंसाया था लोगों को
यह प्राथमिकी सैकड़ों पीड़ितों की शिकायत पर मैसर्स गारवित इनोवेटिव प्रमोटर्स लिमिटेड और उसके कर्मचारियों के खिलाफ एक बाइक के लिए 62,000 रुपये निवेश करने के लिए प्रेरित करके 42,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के लिए दर्ज की गई थी। आरोप है कंपनी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उन्हें मूल राशि सहित 9,500 रुपये मासिक मिलेंगे। आरोपी व्यक्तियों और कंपनी द्वारा प्रदान किए गए आकर्षक प्रस्तावों के कारण कई पीड़ितों ने इस योजना में अपनी गाढ़ी कमाई का भारी मात्रा में निवेश किया।
जनवरी 2019 में शुरू हुई थी बाइकबोट योजना
जनवरी 2019 में आरोपी कंपनी ने इलेक्ट्रिक-बाइक योजना शुरू की और निवेशकों को एक बाइक के लिए 1, 24,000 रुपये जमा करने की पेशकश की। कंपनी ने यह आश्वासन दिया कि उन्हें एक वर्ष तक प्रति माह 17,000 रुपये प्राप्त होंगे। शुरू में आरोपी कंपनी ने सुनिश्चित राशि का भुगतान कर दिया लेकिन निवेशकों का विश्वास जीतने के बाद वे फरार हो गए। याचिकाकर्ता को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इसी तरह के आरोपों वाले मामलों में से एक में जमानत दी गई है और सह-आरोपियों को भी जमानत दी गई है।