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Delhi High Court : पूर्वी नगर निगम को पड़ी डांट, अदालत ने पूछा- जब अधिकारियों को वेतन मिल रहा है तो शिक्षकों को क्यों नहीं 

Thu, 07 Jul 2022 06:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 07 Jul 2022 06:16 AM IST
सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने नगर निगम को फटकार लगाई और चेतावनी कि अधिकारियों का वेतन रोकने का दिया जाएगा आदेश। 

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Delhi High Court asked the Municipal Corporation that when the officers are getting their salary, why not the teachers
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

उच्च न्यायालय ने पूर्वी दिल्ली नगर निगम (अब एकीकृत निगम) के अध्यापकों को वेतन नहीं देने के मुद्दे पर नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने निगम को फटकार लगाते हुए कहा कि अधिकारियों को समय पर वेतन मिल रहा है तो शिक्षकों को क्यों नहीं? वे आपके कर्मचारी हैं या नहीं? अजीब बात है कि आपने पिछले पांच महीनों से वेतन का भुगतान नहीं किया है। अदालत ने सवाल उठाया कि निगमायुक्त को समय पर वेतन मिल रहा है या नहीं? इस पर निगम के वकील ने चुप्पी साध ली।

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मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने पांच प्राथमिक शिक्षकों की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें दावा किया गया है कि उन्हें दिसंबर 2021 से अप्रैल 2022 तक पांच महीने का वेतन देने में निगम विफल रहा है। पीठ ने कहा वे अध्यापक हैं उन्हें समय पर वेतन मिलना चाहिए। अदालत ने निगम के वकील से पूछा कि निगम के प्रमुख कौन हैं? हम इन शिक्षकों को वेतन मिलने तक  विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों का वेतन रोकने के लिए आदेश पारित करेंगे।
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मामले की सुनवाई 22 तक स्थगित
पीठ ने पूछा, इस वक्त निगम के आयुक्त को वेतन मिल रहा है या नहीं, ईडीएमसी के वकील ने कहा कि सवाल का जवाब देना मुश्किल है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसके बारे में सुनवाई की अगली तारीख को बयान दिया जाएगा। पीठ ने मामले की सुनवाई 22 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पूर्व पीठ ने निगम की ओर से पेश वकील के तर्कों को खारिज करते हुए कहा अधिकारियों को समय पर वेतन मिलता है और इन गरीब शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
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ईडीएमसी के वकील ने बताया कि शिक्षकों को वेतन का भुगतान नहीं करने की वजह महत्वपूर्ण निधि की कमी है। उन्होंने कहा निगम में ग्रेड ए अधिकारियों को भी इस साल जनवरी से भुगतान नहीं किया गया है जबकि शिक्षक ग्रेड बी के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने कहा ईडीएमसी ने पहले ही इसी तरह के मुद्दे से संबंधित एक अन्य लंबित मामले में एक आवेदन दायर किया है, जिसमें फंड की कमी के कारण दिल्ली सरकार से फंड जारी करने की मांग की गई है। 

5000 शिक्षकों को वेतन  का भुगतान नहीं
याचिका के अनुसार ईडीएमसी द्वारा संचालित 365 प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 5,000 प्राथमिक शिक्षकों को दिसंबर 2021 से उनके देय वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि निगम अपने कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं करने या देरी करने का बहाना बना रहा है।  ईडीएमसी शिक्षकों को नियमित वेतन का भुगतान करने में असमर्थता के मामले में, निगम को उनके द्वारा संचालित सभी प्राथमिक स्कूलों को आगे के प्रबंधन के लिए दिल्ली सरकार को सौंपने का निर्देश दिया जाए।

52 हजार खाली फ्लैटों की आवंटन प्रक्रिया पर सरकार से मांगा जवाब 

उच्च न्यायालय ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन योजना के तहत निर्मित कम लागत वाले 52 हजार खाली फ्लैटों के आवंटन की प्रक्रिया पर सरकार को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ इस साल जून में न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह द्वारा उक्त योजना के तहत निर्मित फ्लैटों के आवंटन के संबंध में स्वयं संज्ञान लेने संबंधी मामले की सुनवाई कर रही है। अदालत ने मामले की सुनवाई 22 अगस्त तय की है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह ने दिल्ली सरकार द्वारा झुग्गी बस्तियों में रहने वालों के पुनर्वास के लिए बड़ी संख्या में घरों के निर्माण की आवश्यकता जताई थी। साथ ही उन्होंने आंशिक रूप से निर्माण के बावजूद घरों का आवंटित न करने पर नाराजगी भी जताई थी। दिल्ली सरकार के अधिवक्ता गौतम नारायण ने फ्लैट आवंटन के संबंध में किए गए प्रयास की रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया था।

हलफनामा दाखिल करने के लिए न्यायालय से समय मांगा। पीठ ने उन्हें चार सप्ताह में खाली फ्लैटों के आवंटन की आगे की प्रक्रिया के बारे में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सिंह ने कालकाजी मंदिर के पुनर्विकास से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कालकाजी मंदिर परिसर में कुछ झुग्गी निवासियों और अन्य रहने वालों को अनधिकृत रूप से कब्जा मामले के दौरान यह संज्ञान लिया था। 

सीयूटी को लेकर  डीयू का जवाब

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक नीति में कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) आयोजित करने की सिफारिश की गई है, जिसे स्टीफन कॉलेज द्वारा समान रूप से स्वीकार किया जाना है। डीयू ने हाईकोर्ट के समक्ष मामले में पेश जवाब में कहा कि सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान अनारक्षित श्रेणी के तहत छात्रों को पसंद के अनुसार प्रवेश नहीं दे सकते।

स्टीफन कॉलेज ने हाईकोर्ट के समक्ष दिल्ली विश्वविद्यालय के  सीयूईटी के माध्यम से स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने और कॉलेज द्वारा जारी किए गए प्रॉस्पेक्टस को वापस लेने के आदेश को चुनौती दी थी। 

जिम्बाब्वे से उपहार में मिले हाथी को वापस नहीं भेजा जाएगा 

उच्च न्यायालय ने बुधवार को स्पष्ट कर दिया कि 1998 में जिम्बाब्वे सरकार की ओर से भारत को उपहार में दिए गए अफ्रीकी हाथी को वापस नहीं भेजा जाएगा। अदालत ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को हथिनी को दक्षिण अफ्रीकी से आयात करने की संभावना तलाशने के लिए कहा कि यहां इसकी उचित देखभाल की जाएगी। 

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रह्मण्यम प्रसाद की पीठ ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) और भारतीय पशु कल्याण बोर्ड को चिड़ियाघर में रखे गए हाथी के संबंध में संयुक्त रूप से  निरीक्षण कर एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। उच्च न्यायालय अफ्रीकी हाथी शंकर की रिहाई और पुनर्वास की मांग वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। पीठ ने कहा, हमें हाथी को यहीं रखकर उचित देखभाल करेंगे। 

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