दिल्ली: हाईकोर्ट ने वर्चुअल माध्यम से अदालत में सुनवाई की याचिका खारिज की
कोरोना महामारी को लेकर अदालतों में वर्चुअल माध्यम से सुनवाई की व्यवस्था की गई थी। इसे लेकर दिल्ली के एक अधिवक्ता ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की कि कोरोना अभी गया नहीं है। खतरे को देखते हुए इस व्यवस्था को अनिवार्य बनाया जाए।
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दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने वर्चुअल माध्यम से अदालत में सुनवाई की याचिका को खारिज कर दिया। ये याचिका अधिवक्ता मुजीब उर रहमान ने दायर की थी. याचिका में कहा गया था कि वर्चुअल तरीके से सुनवाई सुविधाजनक है और इससे समय की भी बचत होती है.
ये कहा गया याचिका में
याचिकाकर्ता मुजीब उर रहमान ने कहा था कि कोरोना अभी समाप्त नहीं हुआ है और ना हीं सभी लोगों का टीकाकरण हो सका है। खतरा अभी बना हुआ है, इसलिए वर्चुअल माध्यम से अदालत में सुनवाई की व्यवस्था को जारी रखा जा सकता है। याचिका में आगे कहा गया कि प्रत्येक कार्यवाही में अदालत के सामने शारीरिक रूप से उपस्थित होना हमेशा आवश्यक नहीं होता है, इसलिए ऐसी कार्यवाही में वकील, वादी, पक्ष और अदालतें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअल सुनवाई का विकल्प चुन सकती हैं।
दी दलील- निपटाए जा सकेंगे अधिकतम मामलों
याचिकाकर्ता ने कहा कि स्थायी रूप से वर्चुअल तरीके से सुनवाई की अनुमति दी गई तो न्यायालय, वकीलों और पक्षकारों का काफी समय बचेगा. इसके साथ ही वर्चुअल तरीके से सुनवाई की अनुमति मिलने से अधिकतम मामलों को निपटाने और अदालतों के समक्ष बड़ी संख्या में लंबित मामलों को कम किया जा सकता है। वहीं इस तरीके से अदालती कार्यवाही में कागजों का उपयोग कम करके पर्यावरण का संरक्षण भी किया जा सकता है। हालांकि अदालत ने याचिका खारिज कर दी।