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दिल्ली सरकार: 12 कॉलेजों को वेतन के लिए देगी 28.24 करोड़, सीएम केजरीवाल ने जारी करने के दिए आदेश
Tue, 16 Mar 2021 10:47 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Tue, 16 Mar 2021 10:47 PM IST
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अरविंद केजरीवाल
- फोटो : एएनआई
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार से सौ फीसदी वित्त पोषित 12 कॉलेजों में शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक स्टॉफ को वेतन देने के लिए 28.24 करोड़ रुपये जारी करने के आदेश दिए हैं। मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री ने 12 कॉलेजों के प्रिंसिपल के साथ बैठक की।
कॉलेजों में मौजूद फंड को वेतन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं, इस पर कोर्ट के आदेशानुसार ही दिल्ली सरकार आगे फंड जारी करेगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी तरह से स्टाफ के वेतन को रुकने नहीं दिया जाएगा। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री, कॉलेज प्रबंध समिति अध्यक्षों समेत शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार के पास लंबित 28.24 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों व कर्मचारियों की परेशानियों को जानती व समझती है। सरकार नहीं चाहती कि जब तक मामला कोर्ट में विचाराधीन है तब तक वेतन रुका रहे। उन्होंने कहा कि कोर्ट से अपील की जाएगी कि इस फंड को किस मद के तहत खर्च किया जाएगा इस संबंध में वह निर्णय ले।
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उन्होंने कहा कि लंबे समय से डीयू अधिकारियों और कुलपति से बातचीत करने केप्रयास हो रहे हैं। कई लंबित मुद्दों का समाधान हो सके इसके लिए शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया केकार्यालय की तरफ से जल्द ही डीयू कुलपति को बातचीत के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
बैठक में मौजूद शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि 12 कॉलेज यदि खर्च बढ़ाने संबंधी कोई निर्णय लेते हैं तो वह सरकार को विश्वास में लेकर ही करें। उन्होंने कॉलेजों के खातों और बजट में 100 प्रतिशत पारदर्शिता करने पर बल दिया। डीयू के कॉलेजों के खातों और बजट में सभी खर्च स्पष्ट तौर पर दिखाई देने चाहिए। दिल्ली सरकार से वित्त पोषित होने के कारण इन कॉलेजों को दिल्ली सरकार की सहायता के पैटर्न का पालन करना चाहिए।
दिल्ली सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह 2010 से पहले नियुक्त किए गए टीचिंग स्टाफ की तनख्वाह का भुगतान करें, जबकि सरकार केपास इनकी नियुक्ति का रिकॉर्ड नहीं है। कॉलेजों को स्टाफ की नियुक्ति से पहले सरकार से पूर्व अनुमति लेनी चाहिए। वहीं प्रबंध समिति के कार्यकाल को बढ़ाया जाए। कॉलेजों की ओर से जल्द से जल्द यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जारी किए जाएं, जिससे कि सरकार को फंड जारी करने में देरी ना हो।
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कॉलेजों में मौजूद फंड को वेतन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं, इस पर कोर्ट के आदेशानुसार ही दिल्ली सरकार आगे फंड जारी करेगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी तरह से स्टाफ के वेतन को रुकने नहीं दिया जाएगा। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री, कॉलेज प्रबंध समिति अध्यक्षों समेत शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
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अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार के पास लंबित 28.24 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों व कर्मचारियों की परेशानियों को जानती व समझती है। सरकार नहीं चाहती कि जब तक मामला कोर्ट में विचाराधीन है तब तक वेतन रुका रहे। उन्होंने कहा कि कोर्ट से अपील की जाएगी कि इस फंड को किस मद के तहत खर्च किया जाएगा इस संबंध में वह निर्णय ले।
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उन्होंने कहा कि लंबे समय से डीयू अधिकारियों और कुलपति से बातचीत करने केप्रयास हो रहे हैं। कई लंबित मुद्दों का समाधान हो सके इसके लिए शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया केकार्यालय की तरफ से जल्द ही डीयू कुलपति को बातचीत के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
बैठक में मौजूद शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि 12 कॉलेज यदि खर्च बढ़ाने संबंधी कोई निर्णय लेते हैं तो वह सरकार को विश्वास में लेकर ही करें। उन्होंने कॉलेजों के खातों और बजट में 100 प्रतिशत पारदर्शिता करने पर बल दिया। डीयू के कॉलेजों के खातों और बजट में सभी खर्च स्पष्ट तौर पर दिखाई देने चाहिए। दिल्ली सरकार से वित्त पोषित होने के कारण इन कॉलेजों को दिल्ली सरकार की सहायता के पैटर्न का पालन करना चाहिए।
दिल्ली सरकार से उम्मीद की जाती है कि वह 2010 से पहले नियुक्त किए गए टीचिंग स्टाफ की तनख्वाह का भुगतान करें, जबकि सरकार केपास इनकी नियुक्ति का रिकॉर्ड नहीं है। कॉलेजों को स्टाफ की नियुक्ति से पहले सरकार से पूर्व अनुमति लेनी चाहिए। वहीं प्रबंध समिति के कार्यकाल को बढ़ाया जाए। कॉलेजों की ओर से जल्द से जल्द यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जारी किए जाएं, जिससे कि सरकार को फंड जारी करने में देरी ना हो।