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कवायद : दिल्ली सरकार प्राकृतिक तरीके से बांध बनाकर नालों की कर रही है सफाई
Fri, 29 Apr 2022 04:56 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 29 Apr 2022 04:56 AM IST
सार
दिल्ली सरकार प्राकृतिक तरीके से यमुना में गिरने वाले नालों के सीवर की सफाई कर रही है। इसके लिए तैरती नमभूमियों का सहारा लिया गया है। यह नमभूमियां पानी पर तैरती ऐसी ठोस सतह हैं, जिस पर पौधे लगाकर पानी को साफ किया जाता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जीवनदायिनी यमुना नदी को निर्मल बनाने के लिए दिल्ली सरकार ने तैरती नम भूमियों की ‘बूस्टर डोज’ देनी शुरू कर दी है। नदी की सफाई के लिए नजफगढ़ और सप्लीमेंट्री ड्रेन में नम भूमियों का इस्तेमाल हो रहा है।
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जल मंत्री और जल बोर्ड के अध्यक्ष सत्येंद्र जैन ने बृहस्पतिवार सप्लीमेंट्री ड्रेन पर बनी नम भूमियों का मुआयना किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वह ड्रेन पर बने अस्थायी बांधों की मजबूती सुनिश्चित करें। जैन ने कहा कि नम भूमियों के लिए बांस सरीखी प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल करें। इसके सहारे ड्रेन के सीवर को 80 फीसदी तक साफ किया जा सकेगा।
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दिल्ली सरकार प्राकृतिक तरीके से यमुना में गिरने वाले नालों के सीवर की सफाई कर रही है। इसके लिए तैरती नमभूमियों का सहारा लिया गया है। यह नमभूमियां पानी पर तैरती ऐसी ठोस सतह हैं, जिस पर पौधे लगाकर पानी को साफ किया जाता है।
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बेहतर क्वालिटी के पौधे बारिश के दौरान भी नम भूमियों को डूबने नहीं देते और ड्रेन के पानी से प्रदूषकों को प्रकृतिक तरीके से साफ करते रहते हैं। इनको छोटे-छोटे बांध बनाकर रोककर रखा जाता है। नजफगढ़ और सप्लीमेंट्री ड्रेन में इस तरह की नमभूमियां बनाई भी जा रही हैं।
इसके लिए दोनों ड्रेन में करीब 24 छोटे बांध बना लिए गए हैं। इसमें 11 सप्लीमेंट्री ड्रेन पर और 13 नजफगढ़ ड्रेन पर है। जैन ने बताया कि बांध बनाने से पानी में मौजूद सूक्ष्म कण जमीन की सतह पर बैठ जाए, जबकि पानी बांध के ऊपर से निकलता रहता है। वहीं, तैरती नमभूमियां पानी में घुली गंदगी सोखती रहती हैं।
फ्लोटिंग राफ्टर का भी इस्तेमाल
सप्लीमेंटी ड्रेन में फ्लोटिंग राफ्टर भी हैं। इन पर ऐसे पौधे लगे हैं, जिनकी लंबी जड़ें पानी से प्रदूषकों को सोखने की क्षमता रखती हैं। इसके साथ तैरती नमभूमियों से पानी में अच्छे माइक्रोब भी घुल जाते हैं। इस प्रक्रिया से पानी यमुना नदी तक पहुंचने से पहले ही साफ हो जाएगा। नालों में बह रहे गंदे पानी को नालों में ही साफ करने से नए एसटीपी बनाने का खर्च भी बचा है।
चल रही इन सीटू ट्रीटमेंट प्रक्रिया दिल्ली में यमुना में चार बड़े ड्रेन नजफगढ़, सप्लमेंट्री, बारापुला और शाहदरा मिलती हैं। इनके अंदर दिल्ली सरकार सीवेज को इन सीटू ट्रीट कर रही है।
मतलब ड्रेन के अंदर ही चलते पानी को साफ किया जा रहा है। इसमें दिल्ली सरकार ने नए तरीके भी निकाले हैं। इनमें से नालों के रास्ते में छोटे बांध बनाए गए हैं। साथ ही, नालों के ऊपर तैरती नमभूमियां और फ्लोटिंग राफ्टर का निर्माण है, जिससे पानी प्राकृतिक तरीके से साफ हो रहा है।
नमूनों के नतीजा उत्साहवर्धक
बीते दिनों अस्थायी बांधों के बीच के सीवेज से नमूने लिए गए थे। नतीजे उत्साहवर्धक मिले हैं। रिठाला से रोहिणी सेक्टर-15 के बीच सप्लीमेंट्री ड्रेन में निलंबित ठोस पदार्थ का स्तर 166 मिलीग्राम प्रति लीटर से घटकर केवल 49 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गया। जांच में पाया गया कि रिठाला में अमोनिया का स्तर 26 मिलीग्राम प्रति लीटर था। रोहिणी सेक्टर 15 तक आते-आते आंकड़ा 18 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गया।