फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi government has submitted the bio de composer report to the central government

दिल्ली सरकार ने बायो डी कंपोजर की रिपोर्ट केंद्र को सौंपी, पड़ोसी राज्यों में भी यही तकनीकी इस्तेमाल करने की मांग

Fri, 17 Sep 2021 12:14 AM IST
शाहरुख खान डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 17 Sep 2021 12:14 AM IST
सार

दिल्ली सरकार ने बायो डिकंपोजर की रिपोर्ट केंद्र को सौंप दी है। दिल्ली सरकार का दावा है कि इस तकनीकी से पराली की समस्या खेतों में ही खत्म हो जाएगी। इससे राजधानी दिल्ली को पराली जलाने से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण से बचाया जा सकेगा तो इससे खेतों की गुणवत्ता भी सुधरती है। दिल्ली सरकार इस तकनीकी को पड़ोसी राज्यों से भी अपनाने की मांग करेगी।
 

विज्ञापन
Delhi government has submitted the bio de composer report to the central government
अरविंद केजरीवाल - फोटो : पीटीआई

विस्तार

दिल्ली सरकार ने पराली को खत्म करने के लिए बनाई गई तकनीकी बायो डिकंपोजर की रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है। दिल्ली सरकार ने बायो डि कंपोजर का एक थर्ड पार्टी से ऑडिट कराया था जिससे इस तकनीकी से खेतों में ही पराली को समय से खत्म करने के आधिकारिक आंकड़े प्राप्त हुए थे। 
विज्ञापन


दिल्ली सरकार का दावा है कि इस तकनीकी से पराली की समस्या खेतों में ही खत्म हो जाएगी। इससे राजधानी दिल्ली को पराली जलाने से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण से बचाया जा सकेगा तो इससे खेतों की गुणवत्ता भी सुधरती है। दिल्ली सरकार इस तकनीकी को पड़ोसी राज्यों से भी अपनाने की मांग करेगी।
विज्ञापन


दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने वृहस्पतिवार को बताया कि यह तकनीकी किसानों के लिए लाभ का सौदा साबित हुई है। इससे किसानों के खेतों की पराली उनके खेतों में ही 15-20 दिनों में समाप्त हो जाती है, लेकिन पराली के खेतों में ही मिल जाने से मिट्टी की उर्वरता शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा पराली जलाने से दिल्ली को होने वाले प्रदूषण से बचाने में भी मदद मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले वर्ष के आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली के किसानों के पराली न जलाने और अन्य कारणों से गत वर्ष दिल्ली में होने वाले प्रदूषण में कमी आई थी। अब दिल्ली सरकार चाहती है कि उसके साथ-साथ पड़ोसी राज्य भी इस तकनीकी का इस्तेमाल करें जिससे अक्टूबर-नवंबर महीने में पराली जलाने से राजधानी में पैदा होने वाला प्रदूषण रोका जा सके। दिल्ली सरकार का तर्क है कि पराली जलाने से पैदा होने वाले प्रदूषण के लिए किसानों को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए, बल्कि उन्हें उचित विकल्प दिए जाने चाहिए जिससे वे स्वंयं ही पराली जलाने का काम न करें।

वाप्कोस की टीम के रिसर्च के निष्कर्ष

  • किसानों ने कहा, बायो डि-कंपोजर के छिड़काव के बाद 15 से 20 दिनों में पराली समाप्त हो जाती है, जबकि पहले पराली को गलाने में 40-45 दिन लगते थे।
  • पहले 6-7 बार खेत की जुताई करनी पड़ती थी, जबकि बायो डि-कंपोजर के छिड़काव के बाद केवल 1-2 बार ही जुताई करनी पड़ी।
  • मिट्टी में आर्गेनिक कार्बन की मात्रा 05 फीसद से बढ़कर 42 फीसद हो गई।
  • नाइट्रोजन मात्रा 24 फीसद तक बढ़ गई।
  • वैक्टीरिया की संख्या और फंगल (कवकों) की संख्या में क्रमशः 7 गुना और 3 गुना की वृद्धि हुई।
  • बीजों का अंकुरण 17 फीसद से बढ़कर 20 फीसद हो गया।
  • डीएपी खाद की आवश्यकता 46 किलोग्राम प्रति एकड़ से घटकर 36-40 किलोग्राम प्रति एकड़ रह गई।
  • दावा है कि गेहूं की उपज में 5 फीसद बढ़ गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed