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दिल्ली सरकार की मांग : चिकित्सा उपकरणों से हटाया जाए जीएसटी
Sun, 13 Jun 2021 05:48 AM IST
नोएडा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 13 Jun 2021 05:48 AM IST
सार
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सैनिटाइजर, ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, वैक्सीन, थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी के दायरे से बाहर लाने की मांग की।
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मनीष सिसोदिया
- फोटो : एएनआई
विस्तार
जीएसटी काउंसिल की बैठक में दिल्ली सरकार ने आम आदमी पर टैक्स भार कम करने की मांग की। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सैनिटाइजर, ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, वैक्सीन, थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी के दायरे से बाहर लाने की मांग की। तर्क रखा कि कोरोना काल में आर्थिक तंगी से जूझ रहे आम आदमी पर टैक्स का भार न पड़े।
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बैठक के बाद सिसोदिया ने बताया कि बैठक में केंद्र सरकार और भाजपा शासित राज्यों के वित्त मंत्रियों ने इस पर आपत्ति जताई और इन वस्तुओं पर टैक्स बनाए रखने का निर्णय लिया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि आज देशभर के लोगों की जीएसटी काउंसिल की बैठक पर निगाह लगी हुई थी। लोग सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहे थे कि सरकार महामारी से लड़ने के लिए जरूरी वस्तुओं को जीएसटी के दायरे से बाहर करेगी। लेकिन काउंसिल में भाजपा शासित राज्यों के वित्त मंत्रियों सहित केंद्रीय वित्त मंत्री ने इसके उलट निर्णय लिया।
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उन्होंने कहा कि कड़वा सच है कि मास्क, सैनिटाइजर जैसी वस्तुएं लोगों के मासिक बजट का हिस्सा बन चुकी है, लोग जब हर महीने मास्क और सैनिटाइजर खरीदने में 500-500 रुपये खर्च करते हैं तो सोचते हैं कि क्या उन्हें इन पर टैक्स देने से छूट मिलेगी या नहीं। कोरोना के कारण आम आदमी एक ओर जहां पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। बावजूद क्या मेडिकल इक्विपमेंट्स जैसी आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी के दायरे में रखना मानवीय है?
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उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रिटेन में तेजी से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं और इससे भारत में भी कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना है। इस समय राज्य और केंद्र सरकार मिलकर प्राइवेट और सरकारी हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए निवेश कर रही है। लेकिन जब सरकार किसी निजी अस्पताल को 10 लाख रुपये खर्च कर अपने बेड को वेंटीलेटर बेड में तब्दील करने को कहती है तो अस्पतालों के मन में ये सवाल जरूर आता है कि 10 लाख रुपये निवेश करने के साथ-साथ उन्हें 50 हजार रुपये का टैक्स भी देना होगा। इससे वो निवेश के प्रति उदासीन हो जाते है। उन्होंने कहा कि संकट के इस समय सरकारों को टैक्स कमाई करने की बजाय लोगों की मदद करने की जरूरत है।
असहमति जताई
दिल्ली सरकार ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय के इस निर्णय से असहमति जताई है। केंद्र सरकार से अपील की है कि संकट के इस दौर में जब आम आदमी की कमाई बंद हो गई है और वो मेडिकल खर्चों से घिर गया है उस दशा में सरकार आवश्यक मेडिकल वस्तुओं पर टैक्स लगाकर कमाई न करे। सरकार खुले मन और बड़े दिल से इस निर्णय पर दोबारा सोच विचार करे और सैनिटाइजर, ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, वैक्सीन, थर्मामीटर, ऑक्सीमीटर जैसी आवश्यक वस्तुओं को जीएसटी के दायरे से बाहर करे।