दिल्ली चुनाव: क्या नफरत और टकराव की राजनीति को जनता ने नकार दिया?
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सुष्मिता देव, अध्यक्ष, महिला कांग्रेस
भाजपा तो नफरत, बंटवारे और टकराव की राजनीति करके सत्ता का स्वाद चखना चाह रही थी, लेकिन फेल हो गई। पिछली बार से कुछ ही सीट ज्यादा पा सकी। देश के गद्दारों को...गोली मारो...,शाहीन बाग, हिन्दू मुसलमान जैसे बोल नहीं चल पाए। जनता ने पसंद नहीं किया। दिल्ली की जनता ने गवर्नेंस, विकास के कामकाज और साफ सुथरी सरकार की छवि पर वोट दिया है।
हां, यह जरूर है कि जब ऐसी भाषा बोली जाती है तो मतदाताओं का एक हिस्सा थोड़ा सा आकर्षित हो जाता है। इसलिए कुछ वोट शेयर जरूर बढ़ गए होंगे। लेकिन देखिए नतीजा क्या आया? आम आदमी साठ के पार और भाजपा दहाई के नीचे। लेकिन जब सुष्मिता से कांग्रेस का वोट प्रतिशत भी घटने का सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम चुनाव बाद अब इसकी समीक्षा करेंगे।
कांग्रेस के ही दूसरे प्रवक्ता गौरव बल्लभ पंत ने भी कहा कि दिल्ली के जनता का जनादेश सिर माथे पर। पंत ने कहा कि जनता ने देश में सद्भाव, विकास, सहचर्य को वोट किया और नफरत फैलाने वाले, वोटों के ध्रुवीकरण के प्रयासों को नकारा है।
श्याम जाजू, उपाध्यक्ष, भाजपा
भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा है। हम चुनाव के बाद हार के कारणों की समीक्षा करेंगे। उसमें कहां चूक रह गई, इसके कारणों पर विचार किया जाएगा, लेकिन समग्र रूप में देखिए तो भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ा है। हम पिछली बार से दोगुनी से अधिक सीट लाए हैं। जनता ने भाजपा में भरोसा दिखाया है। कांग्रेस पार्टी ने सरेंडर किया है। उसका और आम आदमी पार्टी का वोट प्रतिशत घटा है। भाजपा के अन्य नेताओं का भी कहना है कि हमें पिछली बार से वोट अधिक मिला है। हम अधिक सीटें मिली है।
संजय सिंह, राज्यसभा सांसद, आम आदमी पार्टी
हमें जनता ने जो जनादेश दिया है, शिरोधार्य है। आप इसे यह मत देखिए कि आम आदमी पार्टी को पिछले चुनाव से कम सीटें आई हैं। आप इसे इस तरह से देखिए कि हमारे सामने कौन (भाजपा) था। उन्होंने पूरी फौज उतार दी। खुद अमित शाह ने इतनी जनसभाएं की और वह दावा कर रहे थे कि उनकी 45 से कम सीटें नहीं आएंगी। उन्होंने इसके लिए सारे यत्न कर लिए।