इन कॉलोनियों के लोग आज भी करते हैं इंदिरा गांधी को याद, कांग्रेस में आज भी देखते हैं विकास की सुबह
त्रिलोकपुरी-कल्याणपुरी दिल्ली की उन 612 कॉलोनियों में से एक है, जिसे इंदिरा गांधी ने अपने शासनकाल के दौरान बसाया था। गरीब परिवारों को सम्मानजनक जिन्दगी देने के लिए उन्होंने हर गरीब परिवार को एक छोटे आकार का मकान दिया था। इन कॉलोनियों में उनके रहने के आलावा उनके बच्चों को पढ़ने-लिखने के लिए स्कूल और खेलने के लिए पार्क जैसी सुविधा भी दी गई थी।
झुग्गियों की त्रासदीपूर्ण स्थिति से गरीब परिवारों को बाहर निकालने की वजह है कि यहां के रहने वाले आज भी उनका अहसान नहीं भूलते। बीतते वक्त ने नई पीढ़ी के युवाओं को नये राजनीतिक दलों के आकर्षण में बांध दिया है, लेकिन पुराने समय के लोग आज भी विकास के नाम पर सिर्फ कांग्रेस को ही याद करते हैं।
‘कांग्रेस आए तो बदलाव आये’
लगभग 75 वर्ष की हो चुकीं इमरती देवी बताती हैं कि उनकी जिन्दगी तो कांग्रेस ने ही बदली थी। यह इलाका पूरी तरह जंगल हुआ करता था। वे आईटीओ के पास बनी एक झुग्गी में रहते थे। बाढ़ के समय यमुना उनकी झुग्गियों को बहा ले जाती थी। ऐसे समय में राजघाट के पास सड़क के किनारे उन्हें रहना होता था। लेकिन उसी समय इंदिरा सरकार ने उन्हें यहां लाकर बसाया था। यहां रहने की सुविधा के साथ-साथ खाने-पीने के लिए राशन भी दिया गया था।
बाद में शीला दीक्षित ने इंदिरा गांधी के काम को आगे बढ़ाया था और उनकी जिंदगी बेहतर हुई थी। उन्हें लगता है कि अगर आज भी दिल्ली में कांग्रेस की सरकार आएगी तो विकास की नई सुबह आ जाएगी। वे बताती हैं कि उनका वोट आज भी कांग्रेस को ही जाता है।
‘कांग्रेस ने बदली जिन्दगी’
त्रिलोकपुरी के ब्लॉक नंबर 15 में रहने वाले बुजुर्ग शम्सुद्दीन अहमद (70 वर्ष) बताते हैं कि वे बुलंदशहर के रहने वाले हैं। अपनी जवानी के दिनों में ही कमाने के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख कर लिया था। रेहड़ी-पटरी पर छोटे-छोटे कामकाज करते हुए उनकी जिन्दगी बीत रही थी लेकिन दिल्ली जैसी महंगी जगह में रहने के लिए सुविधा कर पाना उनके जैसे लोगों के बस की बात नहीं थी। लेकिन इंदिरा गांधी ने अपने एक फैसले से इन कॉलोनियों को बसाकर हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी थी।
हालांकि, शम्सुद्दीन अहमद बताते हैं कि शीला दीक्षित सरकार ने यहां से एक रोड निकालने के लिए काफी मकानों को तुड़वा दिया था। यही कारण है कि लोग बाद में उनसे नाराज हो गये थे और लोगों की इसी नाराजगी का फायदा दूसरी पार्टियों को हुआ।
उजड़े घरों के लोगों ने अपने मकानों के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और आखिरकार उन्हें पास ही में छोटे-छोटे लेकिन बेहतर मकान दे दिए गये। आज वे इन्हीं घरों में रहते हैं। अहमद के मुताबिक देश में विकास का नाम तो इंदिरा गांधी ही था, लेकिन बाद में उनके अनुयायियों ने उनकी राह नहीं चुनी, जनता से दूरी बनाई जिसके कारण वे सत्ता में भी कमजोर हो गये।
पूर्वी दिल्ली के जंगल को कांग्रेस ने शहर बनाया
लगभग साठ वर्षीय बुजुर्ग घनश्याम चौधरी बताते हैं कि उनके जमाने में पूरा यमुना पार का इलाका जंगल से अधिक कुछ भी नहीं था। दिल्ली रेलवे स्टेशन से आने के लिए पुराने पुल से होकर एक रास्ता यहां तक आता था। लेकिन बाद में इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार ने लोगों की परेशानी समझी और यहां सड़कें बनायीं। कांग्रेस सरकार के उसी प्रयास का नतीजा हुआ कि पूर्वी दिल्ली में बड़ी-बड़ी कॉलोनियां बसीं, लोग रहने आये और यहां पर लोगों को रोजगार के अवसर बने।
वे आज भी विकास के लिए कांग्रेस सरकार को याद करते हैं और कहते हैं कि इस बार भी उनका वोट कांग्रेस को ही जाएगा चाहे उम्मीदवार जीते या नहीं। लेकिन उनकी भी शिकायत है कि कांग्रेस की नई पीढ़ी उनसे वह संपर्क नहीं रखती, जिसके लिए इंदिरा गांधी और शीला दीक्षित जानी जाती थीं। यही कारण है कि आज लोगों की पसंद बदल रही है और पार्टी को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इंदिरा ने दी थी बड़ी राहत
इंदिरा गांधी ने दिल्ली की कच्ची कोलोनी के लोगों को अपने शासन काल के दौरान बड़ी राहत प्रदान की थी। सत्तर के दशक में उन्होंने दिल्ली की 612 कोलोनियों को एक बार में नियमित कर दिया था। इसके आलावा दिल्ली को झुग्गी-झोपड़ी से मुक्त करने के लिए कांग्रेस के शासन काल में दिल्ली में 46 पुनर्वास कॉलिनियों को बसाया गया था। इनमें यमुना पुश्ते के आसपास और अन्य प्रमुख इलाकों में झुग्गी डालकर रह रहे लोगों को 25-25 वर्ग गज के प्लाट दिए गये थे।