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योगेंद्र यादव बोले, अगर भाजपा की 'घृणा' जीती तो यह बन जाएगा चुनाव जीतने का राष्ट्रीय मॉडल!

Sat, 08 Feb 2020 06:08 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 08 Feb 2020 06:08 PM IST
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delhi election 2020: If BJP communalism wins, it will become the election winning formula in country
योगेंद्र यादव। - फोटो : अमर उजाला।
स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव बताते हैं कि दिल्ली चुनाव में भाजपा अपनी सांप्रदायिकता की राजनीति में कामयाब नहीं होगी। अगर दस दिन के प्रचार में भाजपा की यह 'घृणा' सफल होती है, तो यह चुनाव जीतने का राष्ट्रीय मॉडल बन जाएगा। फिर तो किसी को काम करने की जरूरत ही नहीं है।
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चुनाव से दस दिन पहले शाहीन बाग जैसा कोई मुद्दा उछालो और चुनाव जीत जाओ। मुझे लगता है कि 'घृणा' हारेगी। कुछ इसी ट्रेंड से मिलता-जुलता मॉडल 2019 में तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी प्रयोग किया गया, लेकिन भाजपा को उसमें कामयाबी नहीं मिली।

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महाराष्ट्र में भाजपा के हाथ से सत्ता चली गई, तो हरियाणा में जुगाड़ कर सरकार बनानी पड़ी। झारखंड में पूरी तरह साफ हो गए। राज्यों में चुनाव लोकल मुद्दों पर लड़े जाते हैं। वहां राष्ट्रीय मुद्दा नहीं चलता। दिल्ली में भी यही होने जा रहा है।
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यादव के अनुसार, मीडिया में भले ही कुछ भी बयानबाजी चल रही हो, नेता एक दूसरे पर धर्म को लेकर कैसी भी टीका-टिप्पणी कर रहे हों, मगर चुनाव में स्थानीय मुद्दे ही हावी रहेंगे। लोग शिक्षा पर बात करना पसंद करेंगे। वे स्वास्थ्य पर बोलेंगे और दूसरी सुविधाएं भी उनके दिमाग में रहेंगी।


अब आप दिल्ली में सीएए या 370 जैसे मुद्दों पर चुनाव जीतने की रणनीति बना रहे हों, तो उसमें कामयाबी मिलना बहुत मुश्किल है।

दूसरे राज्यों में तो विपक्ष का मतलब पूरी तरह से सरकार के बाहर होना होता है। दिल्ली में ऐसा नहीं है। यहां भाजपा के पास बहुत कुछ है। एमसीडी में भाजपा है। पुलिस और डीडीए सहित कई दूसरे महकमे केंद्र के नियंत्रण में होते हैं।
 

इन सबके चलते भाजपा की भी तो कोई जिम्मेदारी बनती है। चुनाव में लोग उससे नहीं पूछेंगे कि आपने क्या किया है। आपके पास भी तो पावर है, दिखाएं अपना रिपोर्ट कार्ड। दिल्ली की जनता को अच्छी तरह से मालूम है कि यहां भाजपा आधी सरकार चला रही है।



लेकिन जब कामों को गिनाने की बात आती है, तो दिल्ली भाजपा तुरंत खुद को विपक्ष में बताकर पल्ला झाड़ लेती है। बतौर योगेंद्र, मुझे लगता है कि भाजपा की 'घृणा' हारेगी। उनका यह मॉडल सफल होता नहीं दिख रहा।

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