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क्या नव निर्वाचित अध्यक्ष नड्डा दिल्ली भाजपा को 'आप' के इस चक्रव्यूह में फंसने से बचा पाएंगे?

Wed, 22 Jan 2020 07:09 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 22 Jan 2020 07:09 PM IST
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delhi election 2020: How BHP newly president JP nadda will save delhi bjp from kejriwal strategy
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने जेपी नड्डा - फोटो : BJP Twitter
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा क्या इस बार भी अरविंद केजरीवाल के चक्रव्यूह में फंस कर रह जाएगी, चुनाव प्रचार शुरू होते ही यह सवाल उठने लगा है। पिछले चुनाव में केजरीवाल ने जो चक्रव्यूह रचा था, उसमें भाजपा पूरी तरह फंस गई थी। यहां तक कि अंतिम मौके पर भाजपा का किरण बेदी को चुनाव मैदान में उतारना भी केजरीवाल की रणनीति के मुताबिक रहा।
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नतीजा, केजरीवाल का चक्रव्यूह कामयाब रहा और भाजपा तीन सीटों तक सिमट कर रह गई। इस बार भाजपा के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा दिल्ली चुनाव को लेकर एक्शन में आ गए हैं। दिल्ली भाजपा को केजरीवाल के चक्रव्यूह में फंसने से बचाना उनके लिए बड़ी चुनौती है। यही वजह है कि बुधवार को नड्डा ने लगातार चार जगहों पर आयोजित राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया, बल्कि दूसरी पार्टियों को यह संदेश भी दे दिया कि इस बार भाजपा, केजरीवाल के किसी चक्रव्यूह में नहीं फंसेगी।

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पिछले चुनाव में केजरीवाल के चक्रव्यूह में फंसी भाजपा

2015 के चुनाव में केजरीवाल ने भाजपा को घेरने के लिए चक्रव्यूह रचा। उन्होंने ऐसी रणनीति बनाई कि भाजपा खुद ब खुद उस ओर खिंचती चली आई। उस वक्त जब केजरीवाल की पार्टी अपने चुनाव प्रचार के दो चरण खत्म कर चुकी थी, तब तक भाजपा-कांग्रेस अपने उम्मीदवारों का चयन भी नहीं कर सकी थीं। सब कुछ केजरीवाल के चक्रव्यूह के अनुसार चल रहा था। अपनी रणनीति के तहत उन्होंने लोगों को पहले यह कहा कि भाजपा के पास मुख्यमंत्री के लिए कोई चेहरा नहीं ही नहीं है।
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रणनीति के दूसरे कदम में केजरीवाल ने कथित तौर पर भाजपा के ऐसे नेताओं को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बताना शुरू कर दिया, जो उनके सामने कहीं नहीं ठहरते थे। वे कभी विजय गोयल तो कभी विजेंद्र गुप्ता का फोटो अपनी तस्वीर के साथ लगा लिया करते थे। वे चाहते थे कि भाजपा यह बयान देने के लिए मजबूर हो जाए कि ये दोनों मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं हैं। बिल्कुल यही हुआ और भाजपा को कहना पड़ा कि अभी तक पार्टी ने किसी भी नेता को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। केजरीवाल का यह चक्रव्यूह कामयाब रहा।

जगदीश मुखी के बाद किरण बेदी

इसके बाद केजरीवाल ने एक नया चेहरा भाजपा सीएम पद के लिए आगे बढ़ाया। उन्होंने जगदीश मुखी का फोटो अपनी तस्वीर के साथ लगाकर कई दिन तक यह प्रचार किया कि भाजपा ने मुखी को मैदान में उतारा है। भाजपा को कहना पड़ा कि मुखी सीएम पद के उम्मीदवार नहीं हैं। आप नेता ने लोगों को यह यकीन दिला दिया कि भाजपा के पास कोई भी नेता ऐसा नहीं है कि जिसे वे सीएम का प्रत्याशी घोषित कर सकें।

नतीजा, भाजपा जब किरण बेदी का नाम आगे लाई तो केजरीवाल इस कदम से बहुत प्रसन्न हुए थे। उस दौरान उनके सहयोगी रहे प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव ने साफ तौर पर कह दिया कि बेदी को लाना भाजपा पर भारी पड़ेगा। यही हुआ और आप को 67 सीट मिल गई। यानी भाजपा केजरीवाल के चक्रव्यूह में फंस कर रह गई।

केजरीवाल से निपटने की बड़ी चुनौती...    

केजरीवाल इस बार भी लोगों से कह रहे हैं कि भाजपा इतनी बड़ी पार्टी है, लेकिन उसके पास एक भी ऐसा चेहरा नहीं है, जिसे दिल्ली के मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया जा सके। आम आदमी पार्टी विशेष रणनीति के तहत चुनाव प्रचार का पहला चरण पूरा कर चुकी है, तो भाजपा-कांग्रेस जैसे दल अभी रणनीति तैयार कर रहे हैं। प्रचार का प्रथम चरण पूरा होने के बाद अब आप के घर-द्वार कार्यक्रम के तहत पार्टी कार्यकर्ता एक घर में कम से कम चार बार जाएंगे। वे पांच-पांच मिनट के लिए वोटरों से बातचीत करेंगे।

इसके साथ पार्टी के स्टार प्रचारक अरविंद केजरीवाल सभी विधानसभा क्षेत्रों में रोड शो करेंगे। दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी एक्शन में आ गए हैं। उन्होंने बुधवार को नवादा 'उत्तम नगर', मटियाला रोड, सागरपुर 'द्वारका' में कार्यकर्ताओं से मिलने का कार्यक्रम बनाया। नड्डा अगले दिनों में ऐसे कई कार्यकर्ता सम्मेलनों में भाग लेंगे। उनका प्रयास है कि 2015 की तरह भाजपा केजरीवाल के किसी चक्रव्यूह में न फंसे।



यही वजह है कि इस बार भाजपा विशाल रैलियों की बजाए छोटी जनसभाओं और नुक्कड़ स्तर की बातचीत को कहीं ज्यादा तव्वजो देने की तैयारी कर रही है। भाजपा भी अपने मंत्रियों को साथ लेकर घर-द्वार कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही है।

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