आप घोषणा पत्र में आज भी है अन्ना का लोकपाल, जिसे सीढ़ी बना सीएम की कुर्सी तक पहुंचे केजरीवाल!
- आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को जारी किया घोषणा पत्र
- इसमें दिल्ली जनलोकपाल बिल नंबर एक पर तो स्वराज विधेयक को दूसरे स्थान पर रखा गया है
- खास बात, 2015 के घोषणा पत्र में भी ये दोनों मुद्दे पहले और दूसरे नंबर पर थे
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2011 का अन्ना आंदोलन आपको ध्यान होगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे और उनकी टीम की तरफ से शुरू किए गए इस आंदोलन का मकसद था कि देश में एक मजबूत जनलोकपाल बनाना। ऐसा लोकपाल, जिसके दायरे में पीएमओ तक आ जाए। उस दौरान अरविंद केजरीवाल भी अन्ना की टीम के सदस्य थे।
उन्होंने जब आम आदमी पार्टी बनाई तो लोकपाल बिल और स्वराज को सबसे ऊपर रखा। 2013 और 2015 के चुनाव में भी ये मुद्दे खूब भुनाए गए। पिछले विधानसभा चुनाव में जब आप का घोषणा पत्र आया, तो उसमें टॉप पर ये दोनों मुद्दे थे। पांच साल बीत गए और 2020 का चुनाव आ गया। चार फरवरी को केजरीवाल ने अपनी पार्टी का घोषणा पत्र जारी किया। इसमें भी पहले नंबर पर दिल्ली जनलोकपाल बिल और दूसरे नंबर पर दिल्ली स्वराज बिल को लेकर बात की गई है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 2015 में अपने चुनावी घोषणा पत्र के बारे में कहा था, यह दस्तावेज कोई मामूली चुनावी दस्तावेज नहीं है, बल्कि पार्टी की गीता, बाइबिल, कुरान और गुरु ग्रंथ साहिब है। उन्होंने कहा था कि दिल्ली में आप की सरकार बनते ही इन सभी घोषणाओं पर काम किया जाएगा। इन्हें मूल रूप में ही लागू करेंगे।
28 pointer #AAPManifesto pic.twitter.com/FyGt6ckoRB— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) February 4, 2020
हमारे लिए दिल्ली जनलोकपाल और स्वराज विधेयक बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये अन्ना हजारे के आंदोलन से निकले मुद्दे हैं। हम एक ऐसा जनलोकपाल चाहते हैं, जिसमें दिल्ली सरकार के सभी अधिकारी, जिनमें मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायक भी शामिल हैं, जांच के दायरे में आ जाएं। केजरीवाल ने कहा था, जनलोकपाल बिल के तहत दिल्ली सरकार के सभी अफसरों को अपनी परिसंपत्तियों की सालाना घोषणा करनी होगी। इसके अलावा अघोषित परिसंपत्तियों को जब्त करने का प्रावधान भी रहेगा।
भ्रष्टाचार के सभी मामलों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित होगी। दिल्ली के लोकपाल को भ्रष्टाचार के आरोपी लोगों के खिलाफ जांच और अभियोजन शुरू करने की शक्ति दी जाएगी। सभी सरकारी दफ्तरों में नागरिक चार्टर लागू होगा। व्हिसल ब्लोअर्स को पूर्ण सुरक्षा दी जाएगी। दिल्ली के लोगों की शासन में पूर्ण सहभागिता रहे, इसके लिए स्वराज विधेयक लाएंगे। स्थानीय समुदायों को सूक्ष्म स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करेंगे।
स्वराज के जरिए आप सरकार यह प्रयास करेगी कि नौकरशाहों और निर्वाचित प्रतिनिधियों की बजाए फैसले लेने की राजनीतिक क्षमता आम लोगों के हाथों में रहे। स्थानीय समुदाय को प्रभावित करने वाले फैसले वहां के नागरिक लेंगे। बाद में उन्हें सचिवालय की तरफ से लागू कर दिया जाएगा। मोहल्ला सभा और रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन को स्थानीय क्षेत्र के विकास के लिए अलग से फंड मिलेगा।
2020 में इन दोनों मुद्दों पर क्या बोलते हैं केजरीवाल
मंगलवार को जारी पार्टी के घोषणा पत्र में ये दोनों मुद्दे एक और दो नंबर पर हैं। इनके जरिए केजरीवाल दिखाना चाहते हैं कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने का दम रखते हैं, बशर्तें केंद्र सरकार कुछ सहयोग करे। घोषणा पत्र में नंबर एक पर 'दिल्ली जनलोकपाल बिल' लिखा है।
इसमें कहा गया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने तो इसे दिसंबर 2015 में पास कर दिया था। अब यह केंद्र सरकार की ओर से लंबित है। आप सरकार ने तो इसे पास कराने के लिए लगातार संघर्ष किया है। लेकिन केंद्र सरकार इसे मंजूरी नहीं दे रही।
घोषणा पत्र में दूसरे नंबर पर है दिल्ली स्वराज बिल, जिसमें लिखा है कि दिल्ली सरकार ने 2972 मोहल्ला सभाओं को जून 2016 में मंजूरी दे दी थी। यह लोगों को सरकार में शामिल करने की दिशा में पहला चरण था। इस बिल की मदद से लोगों की सरकार में सहभागिता को बढ़ाया जा सकता है।
दिल्ली स्वराज बिल के जरिए मोहल्ला सभाओं को कुछ वित्तीय शक्तियां देने का भी प्रावधान किया गया है। इस घोषणा पत्र में भी ये दोनों बिल केंद्र सरकार की मर्जी पर डाल दिए गए हैं। केजरीवाल का कहना है कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द इन बिलों को मंजूरी दे, ताकि इन्हें लागू कर काम शुरू किया जा सके।