{"_id":"635ee069d0c70b51bc7f9c0a","slug":"delhi-aiims-treatment-will-be-available-in-primary-health-centers-of-ncr","type":"story","status":"publish","title_hn":"AIIMS Treatment : एनसीआर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मिलेगा एम्स का उपचार, बनेगी रिवर्स नीति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
AIIMS Treatment : एनसीआर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मिलेगा एम्स का उपचार, बनेगी रिवर्स नीति
Mon, 31 Oct 2022 04:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 31 Oct 2022 04:04 AM IST
सार
Delhi : दिल्ली-एनसीआर में रह रहे नागरिकों को अच्छे इलाज के लिए जल्द ही एम्स या दिल्ली के अन्य बड़े अस्पतालों का रुख नहीं करना होगा। उन्हें नजदीक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में ही एम्स जैसी आधुनिक सुविधाएं मिल जाएंगी।
विज्ञापन
दिल्ली एम्स
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दिल्ली-एनसीआर में रह रहे नागरिकों को अच्छे इलाज के लिए जल्द ही एम्स या दिल्ली के अन्य बड़े अस्पतालों का रुख नहीं करना होगा। उन्हें नजदीक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में ही एम्स जैसी आधुनिक सुविधाएं मिल जाएंगी। जरूरत पड़ने पर एम्स के डॉक्टर टेली मेडिसन सुविधा के माध्यम से उन्हें दवाई देंगे और सर्जरी या अन्य की आवश्यकता पड़ने पर आसपास के अस्पतालों में उक्त सुविधा भी उपलब्ध करवा देंगे।
विज्ञापन
दरअसल एम्स में दिल्ली के अलावा एनसीआर क्षेत्र से काफी संख्या में मरीज आते हैं। इनमें से काफी मरीज यलो (स्थिर) स्तर के होते हैं, जिन्हें स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में ही सुविधा मिल सकती है, लेकिन अच्छे डॉक्टर न होने के कारण मरीज बड़े अस्पतालों के तरफ रुख करते हैं। प्रबंधन की इस समस्या को देखते हुए एम्स ने रेफरल नीति में दिल्ली के अस्पतालों के साथ एनसीआर के लेवल 1 (पीएचसी, सीएचसी), लेवल 2 (सामान्य अस्पताल) और लेवल 3 (सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल व मेडिकल कॉलेज) अस्पतालों को शामिल करने का निर्णय लिया है।
विज्ञापन
इन अस्पतालों के बीच समन्वय बनाने के लिए एम्स जल्द ही केंद्र सरकार, राज्य सरकार, दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के साथ संवाद करेगा। शनिवार को एम्स निदेशक डॉ. एम श्री निवास की अध्यक्षता में इस बात पर सहमति बनी है। एम्स आरडीए के उपाध्यक्ष विनय कुमार ने कहा कि ऐसी नीति तैयार करने पर सहमति बनी है, जिसमें मरीज को जहां हैं वहीं उसे बेहतर उपचार मिल सकेगा।
विज्ञापन
ओटी व उपकरणों का होगा इस्तेमाल
दिल्ली एनसीआर में बड़ी संख्या में ऐसे सार्वजनिक अस्पताल हैं जहां बड़ी संख्या में बेड खाली हैं। इनके अलावा वहां पर आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर, एमआरआई मशीन सहित अन्य सुविधाएं हैं, लेकिन मैन पावर व अन्य सुविधा न होने के कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। ऐसे में निर्णय लिया गया है कि मरीजों के हित एक नीति बनाकर उक्त सुविधाओं का इस्तेमाल एम्स या अन्य बड़े अस्पताल करें।
बनेगी रिवर्स नीति
बैठक में मरीज की रिवर्स नीति बनाने पर भी विचार हुआ। इस फैसले के तहत यदि किसी मरीज को जांच या सर्जरी के लिए बड़े अस्पताल लाया जाता है। सर्जरी व जांच के बाद उक्त मरीज को केवल डॉक्टर की देखभाल की जरूरत है तो उसे बड़े अस्पताल से वापस उसी छोटे अस्पताल में भेज दिया जाएगा। इससे बड़े अस्पताल में बेड दूसरे को मिल सकेगा वहीं छोटे अस्पताल के बेड का भी इस्तेमाल हो जाएगा। इसके अलावा लीवर से जुड़ी बीमारी के लिए आईएलबीएस में बेहतर सुविधा है तो एम्स उससे तकनीक साझा करेगा।
बनेगा कोविन जैसा एप
बैठक में सहमति बनी है कि दिल्ली-एनसीआर के सभी अस्पतालों के बेड व अन्य सुविधा को लेकर एक कोविन जैसा एप तैयार किया जाए, जिनपर सुविधाओं को लाइव अपडेट मरीज व डॉक्टर को मिल सकें। इससे मरीज को बेहतर सुविधा तो मिलेगी, साथ ही मरीज को उपचार के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। एम्स ने शनिवार से ही डेशबोर्ड बनाकर लाइव अपडेट देना शुरू कर दिया है। जल्द ही अन्य अस्पतालों को भी जोड़ा जाएगा।
तकनीक का लिया जाएगा साथ
बैठक में सुझाव आया है कि कोरोना महामारी के दौरान तकनीक की मदद से लॉकडॉउन के दौरान भी मरीजों को सुविधा दी गई है। ऐसे में एनसीआर के सभी अस्पतालों को नए तकनीक के माध्यम से अपग्रेड किया जाना चाहिए। तकनीक की मदद से दूर-दराज के क्षेत्रों में बेहतर सुविधा मिल सकेगी।