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नेशनल फोरम 2021: एम्स निदेशक गुलेरिया बोले, कोरोना ने बताया कि प्रौद्योगिकी कैसे गेम-चेंजर साबित हो सकती है

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Fri, 22 Oct 2021 04:24 PM IST

सार

भारत के आठवें नेशनल फोरम 2021 के पब्लिक अफेयर्स फोरम में शुक्रवार को डॉ. गुलेरिया ने कहा कि कोरोना महामारी ने प्रौद्योगिकी की जरूरत समझा दी और बता दिया कि कैसे इसका उचित उपयोग ऐसे देश में गेम-चेंजर साबित हो सकता है जहां स्वास्थ्य विभाग में संसाधनों और मानव संसाधनों की बड़ी समस्या है।
डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, दिल्ली एम्स
डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, दिल्ली एम्स - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना महामारी ने प्रौद्योगिकी की जरूरत समझा दी और बता दिया कि कैसे इसका उचित उपयोग ऐसे देश में गेम-चेंजर साबित हो सकता है जहां स्वास्थ्य विभाग में संसाधनों और मानव संसाधनों की बड़ी समस्या है।

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भारत के आठवें नेशनल फोरम 2021 के पब्लिक अफेयर्स फोरम में शुक्रवार को उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी ने प्रौद्योगिकी की महत्ता समझाई और इसने वास्तव में बताया कि देश में प्रौद्योगिकी का सही तरह से उपयोग करना गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जहां स्वास्थ्य विभाग में मूलभूत जरूरतों और मानव संसाधनों की भारी कमी है। इसलिए हमने बहुत जल्द टेलीकम्युनिकेशन को अपना लिया, जिससे देशभर में एक बार में कई मरीजों को बिना अस्पताल में बुलाए उनसे संपर्क किया जा सकता है।

गुलेरिया ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य के मामले में शहरी तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में काफी भेदभाव है। इसका समाधान निकाला जाना चाहिए। और कभी कभी मुझे इस बात की चिंता होती है कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रौद्योगिकी से यह भेदभाव बढ़ना नहीं चाहिए।

एम्स प्रमुख ने कहा कि प्रौद्योगिकी के उपयोग पर अभी बहुत फोकस करना है और हमें गैर संचारित बीमारियों की स्क्रीनिंग या कैंसर के मामलों में हमें यह करना है, जिससे बीमारी का बोझ व्यापक स्तर पर कम करने में मदद मिलती है। हमे शोध में और निवेश करना होगा, जो भारत के लिए जरूरी है और इससे नवोन्मेष को और ज्यादा बढ़ावा मिलेगा।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आरएस शर्मा ने कहा कि कई क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर खर्चा कम किया जा सकेगा और उस कमी से सेवा प्रदाताओं और जनता पर भी असर पड़ेगा। 

उन्होंने कहा, मैं इससे पूरी तरह सहमत हूं कि प्रौद्योगिकी को समावेशी होना होगा। यह इस सेक्टर में पहले से मौजूद है तो इसमें विविधता लानी होगी। इसे ऐसा बनना होगा कि लोग इसका आसानी से उपयोग कर सकें।

निजता के सवाल पर उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि निजता का सोचेंगे तो इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होगी। बात ये है कि आप जानते हैं कि मैं अगर काम छिपाता हूं तो मैं इससे कुछ नहीं कर सकता। लेकिन बात ये नहीं है। अगर आप सावधानीपूर्वक डिजायन करेंगे तो आपको निजता से समझौता किए बिना ही इसकी पूरी क्षमता का उपयोग कर सकेंगे।
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