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डेंगू का डंक: एम्स से लेकर प्राइवेट अस्पतालों में लगातार हो रहीं मौतें, बिस्तरों का संकट बरकरार, डॉक्टरों को 10 फीसदी पार मृत्युदर की आशंका

Thu, 11 Nov 2021 06:49 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 11 Nov 2021 06:49 PM IST
सार

दिल्ली के अस्पतालों में डेंगू से मरने वालों की संख्या 100 पार जा चुकी है। वहीं दिल्ली के सरकारी रिकॉर्ड में अब तक केवल नौ लोगों की मौत हुई है। 

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death toll due to dengue infection in delhi hospitals has crossed 100
डेंगू वार्ड में भर्ती मरीज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के अस्पतालों में डेंगू संक्रमण के चलते मरने वालों की संख्या 100 पार हो चुकी है। अकेले सफदरजंग अस्पताल में ही 20 से अधिक मरीज अब तक दम तोड़ चुके हैं। वहीं दिल्ली एम्स में 12, आरएमएल में 11, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में छह मौतें हुई हैं। इनके अलावा मैक्स, अपोलो और फोर्टिस के अलग अलग अस्पतालों में करीब 30 से अधिक मरीजों की डेंगू की चपेट में आने से मौतें हुई हैं। इनके अलावा दूसरे सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में भी डेंगू संक्रमण के चलते मरीजों की मौतें हो रही हैं। 

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सर गंगाराम अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि डेंगू संक्रमण का असर इस बार जो मरीजों पर दिखाई दे रहा है उससे साफ जाहिर है कि इसकी मृत्युदर 10 फीसदी से भी अधिक है। अगर कोरोना संक्रमण से तुलना करें तो यह करीब-करीब 10 गुना होगी। 
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दिल्ली नगर निगम के अनुसार राजधानी में पिछले सप्ताह तक नौ लोगों की मौत डेंगू से हो चुकी है। जबकि अस्पतालों में डेंगू संक्रमण से मरने वालों की संख्या कहीं अधिक हो चुकी है। अब तक दिल्ली में डेंगू के 2708 मामले सामने आ चुके हैं। पिछले एक सप्ताह में ही 1,171 लोग डेंगू संक्रमित पाए गए हैं। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि इनमें दिल्ली के बाहरी राज्यों से आने वाले लोग शामिल हो सकते हैं क्योंकि राजधानी के अस्पतालों में बाहरी राज्यों से आए मरीजों की संख्या भी काफी संख्या में है।
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43 फीसदी लोगों के परिवार में हुआ डेंगू : ऑनलाइन सर्वे
लोकल सर्कल्स ने ऑनलाइन सर्वे के जरिए दावा किया है कि दिल्ली-एनसीआर के करीब 43 फीसदी परिवारों ने यह स्वीकार किया है कि उनके परिवार या पहचान वाले परिवार में किसी न किसी सदस्य को डेंगू संक्रमण हुआ है। वहीं केवल दिल्ली की बात करें तो यहां संख्या 45 फीसदी है। 6,797 लोगों से बातचीत के आधार पर यह सर्वे जारी किया गया है। साथ ही बताया गया कि मैक्स और अपोलो जैसे राजधानी के बड़े अस्पतालों में डेंगू मरीजों की संख्या 30 से 60 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। 

मल्टी ऑर्गन फेलियर के 20 से ज्यादा मामले
डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू का वायरस खून में मिलते ही यह इतनी तेजी से शरीर के विभिन्न अंगों को चपेट में ले रहा है कि मरीज तीन से चार दिन में ही गंभीर हालत में जा पहुंचता है। कई मामले ऐसे भी देखने को मिल रहे हैं जिसमें वायरस सबसे पहले लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा रहा है। अकेले नई दिल्ली स्थित आईएलबीएस अस्पताल में ही नौ मरीज भर्ती हो चुके हैं जिन्हें डेंगू संक्रमण के चलते लिवर और किडनी फेल होने के कारण आईसीयू में भर्ती किया है। ठीक इसी तरह एम्स में भी पांच, सफदरजंग में 12 और लोकनायक अस्पताल में चार मरीज मिल चुके हैं। इनके अलावा दूसरे प्राइवेट अस्पतालों में भी यह स्थिति देखने को मिल रही है। गंगाराम अस्पताल के डॉ. अतुल गोगिया ने भी इसकी पुष्टि करते हुए अपने अस्पताल में भी मल्टी ऑर्गन फेलियर के कई मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। 


हर चौथा डेंगू मरीज दिल्ली में ‘लापता’
नगर निगम के अनुसार डेंगू संक्रमण की पुष्टि होने के बाद जब मरीज के बताए पते पर निगम की टीमें पहुंचीं तो कई लोगों का सही पता नहीं था। इन लोगों की निगरानी नहीं हो पाई। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि 2708 में से 698 मरीजों की निगरानी नहीं हो पाई है। अगर गणितीय आकलन के जरिए देखें तो चार में से एक डेंगू संक्रमित मरीज सरकारी निगरानी सिस्टम से बाहर है। उन्होंने बताया कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में 237, दक्षिणी निगम और पूर्वी नगर निगम के क्षेत्र में 220-220 मरीज निगरानी से बाहर हैं। इन मरीजों की खोज जारी है। जन स्वास्थ्य नियमों के अनुसार डेंगू संक्रमण का कोई भी मामला मिलने पर उसके निवास और आसपास क्षेत्र में फॉगिंग की जाती है। साथ ही अन्य लोगों की रक्त जांच भी होती है लेकिन इन मरीजों की निगरानी न होने से डेंगू संक्रमण के स्त्रोत का पता नहीं चल पाएगा जिसके चलते समय रहते संक्रमण को नियंत्रण करने में कामयाबी नहीं मिल पाएगी। 

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