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Delhi News: बीमा की राशि दिलाने का झांसा देकर करोड़ों ठगे, सात गिरफ्तार

Tue, 02 Apr 2024 09:16 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 02 Apr 2024 09:16 PM IST
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Crores of rupees were cheated on the pretext of getting insurance money, seven arrested
निर्माण विहार में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर ठगी को दे रहे थे अंजाम
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20 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप और एक पेन ड्राइव बरामद

अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (आईएफएसओ) यूनिट ने बीमा पॉलिसी की परिपक्वता राशि दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी निर्माण विहार में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर ठगी को अंजाम दे रहे थे। आरोपियों ने दस पीड़ितों से 6 करोड़ रुपये की ठगी की थी। पुलिस ने इनके कब्जे से 20 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप और एक पेन ड्राइव बरामद की है।
आरोपियों की पहचान गोविंदपुर निवासी निशांत कुमार, नजफगढ़ निवासी देवेंद्र कुमार, शाहदरा निवासी मनीष कुमार, गाजियाबाद निवासी अंकित गौड़, गाजियाबाद के शास्त्री नगर निवासी सुनील यादव, गाजियाबाद के वसुंधरा निवासी भूपेंद्र कुमार और उत्तम नगर निवासी अष्टभुजेश पांडे के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ग्रीन पार्क के रहने वाले हरिदत्त शर्मा ने ठगी की शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारी एजेंसियों एनपीसीआई, आरबीआई, एसबीआई का अधिकारी बताकर उनसे करीब 3.5 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। अप्रैल 2018 में आरोपियों ने खुद को बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण का प्रतिनिधि बताया। साथ ही उन लोगों ने शिकायतकर्ता को बताया कि बीमा कंपनियों में उनके निवेश के लाखों रुपये जमा हो गए हैं, जिसे वह कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद निकाल सकते हैं। उन्होंने शिकायतकर्ता का विश्वास जीतने के लिए फर्जी पहचान पत्र और आधार कार्ड दिखाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।
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एसीपी जयप्रकाश की देखरेख में निरीक्षक भंवर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई। जांच में पता चला कि राजेंद्र प्रसाद नाम से एक शख्स ने शिकायतकर्ता से अंतिम बार संपर्क किया था। पुलिस ने तकनीकी जांच कर संपर्क करने वाले मुख्य आरोपी निशांत कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उससे पूछताछ के बाद पुलिस ने छह अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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सभी आरोपी अलग-अलग नाम से बातचीत करते थे
पूछताछ के बाद पुलिस अधिकारी ने बताया कि निशांत कुमार ठगी का मास्टर माइंड है। वह निर्माण विहार में एक कमरा किराये पर लेकर वहां फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। वह पीड़ितों का विवरण, डेटा, मोबाइल फोन, सिम और बैंक खाते उपलब्ध करता था। देवेंद्र जाली दस्तावेज तैयार करता था। सभी आरोपी शिकायतकर्ताओं से अलग-अलग नाम और पद से उनसे बातचीत करते थे। आरोपी विभिन्न सरकारी एजेंसियों एनपीसीआई, आरबीआई, एसबीआई के फर्जी पत्र भेजते थे। आरोपी अष्टभुजेश पांडे शिकायतकर्ता से पैसे लेता था। अंकित गौड़ और सुनील यादव ठगी की रकम लेने के लिए बैंक खाते का इंतजाम करते थे।
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