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दिल्ली सरकार के तीन कर्मी नौकरी से हटाए गए
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दिल्ली सरकार के तीन कर्मचारी हटाए
जमीन के दस्तावेज में हेराफेरी का आरोप मिला सही, दो को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, एक बर्खास्त
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जमीन के दस्तावेज में हेराफेरी करने पर दिल्ली सरकार के तीन कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है। इनमें दो तहसीलदार और एक सब रजिस्ट्रार थे। मुख्य सचिव विजय देव ने दो कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने और एक को नौकरी से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। तीनों पर जमीन के मालिकाना हक में बदलाव व दस्तावेज में हेराफेरी का आरोप था।
पूर्व सब रजिस्ट्रार वेद प्रकाश पर आरोप था कि 2013 में पद पर रहते हुए उन्होंने टिकरी कलां गांव की सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए आवंटित जमीन की सेल डीड का पंजीकरण किया, लेकिन इसके लिए एडीएम से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया। मामला प्रकाश आने पर जांच शुरू हुई। इसमें सब रजिस्ट्रार को दोषी पाया गया है। दूसरी तरफ, प्रीत विहार के पूर्व तहसीलदार सुशील भारती ने 2011-12 में ग्रामसभा के लिए अधिगृहीत जमीन की गलत स्टेटस रिपोर्ट दी थी। इसके बाद सार्वजनिक जमीन को खरीद-फरोख्त की श्रेणी में डाल दिया गया। शिकायत के बाद हुई जांच में दोषी पाए जाने पर उनको अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है। इसके अलावा तहसीलदार समीर शर्मा को भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। इन्होंने अधिगृहीत जमीन को सरकार के नाम पर हस्तांतरित कर उसका पंजीकरण नहीं किया। वह रिकॉर्ड में हेराफेरी करने की कोशिश कर रहे थे।
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जमीन के दस्तावेज में हेराफेरी का आरोप मिला सही, दो को अनिवार्य सेवानिवृत्ति, एक बर्खास्त
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जमीन के दस्तावेज में हेराफेरी करने पर दिल्ली सरकार के तीन कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है। इनमें दो तहसीलदार और एक सब रजिस्ट्रार थे। मुख्य सचिव विजय देव ने दो कर्मियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने और एक को नौकरी से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। तीनों पर जमीन के मालिकाना हक में बदलाव व दस्तावेज में हेराफेरी का आरोप था।
पूर्व सब रजिस्ट्रार वेद प्रकाश पर आरोप था कि 2013 में पद पर रहते हुए उन्होंने टिकरी कलां गांव की सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए आवंटित जमीन की सेल डीड का पंजीकरण किया, लेकिन इसके लिए एडीएम से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया। मामला प्रकाश आने पर जांच शुरू हुई। इसमें सब रजिस्ट्रार को दोषी पाया गया है। दूसरी तरफ, प्रीत विहार के पूर्व तहसीलदार सुशील भारती ने 2011-12 में ग्रामसभा के लिए अधिगृहीत जमीन की गलत स्टेटस रिपोर्ट दी थी। इसके बाद सार्वजनिक जमीन को खरीद-फरोख्त की श्रेणी में डाल दिया गया। शिकायत के बाद हुई जांच में दोषी पाए जाने पर उनको अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है। इसके अलावा तहसीलदार समीर शर्मा को भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है। इन्होंने अधिगृहीत जमीन को सरकार के नाम पर हस्तांतरित कर उसका पंजीकरण नहीं किया। वह रिकॉर्ड में हेराफेरी करने की कोशिश कर रहे थे।
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