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सीपीसीबी ईंट निर्माताओं के प्रस्ताव पर जल्द लें निर्णय : एनजीटी
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ईंट निर्माताओं के प्रस्ताव पर जल्द
निर्णय ले सीपीसीबी : एनजीटी
- जिला गाजिायाबाद ईंट निर्माता समिति ने मांगी है भट्ठों के संचालन की अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को गाजियाबाद में पर्यावरण के अनुकूल ईंट निर्माण का दावा करने वाले भट्ठों के संचालन पर जल्द निर्णय लेने का आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि जिला गाजियाबाद ईंट निर्माता समिति का दावा है कि वह पारंपरिक भट्ठों में सरसों की भूसी को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करती है। इस ईंट निर्माण प्रक्रिया से पर्यावरण और सेहत को किसी तरह का नुकसान नहीं है। ऐसे में सीपीसीबी इस पहलू की जांच कर तत्काल निर्णय ले।
जस्टिस आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश में कहा कि सीपीसीबी समिति की ओर से उठाई गई मांगों पर गौर करे और यदि तकनीकी तौर पर उनका दावा सही है तो वह इन भट्ठों को संचालन की अनुमति दे। इस संबंध में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी अनुमति ली जानी चाहिए। समिति का दावा है कि वह फिक्स चिमनी युक्त बुल ट्रेंच किल्न (एफसीबीटीके) में सरसों की भूसी का इस्तेमाल ईंधन के तौर पर करती है। इस तरह ईंट निर्माण से पर्यावरण और लोगों की सेहत को किसी तरह का नुकसान नहीं है। इस तकनीकी को सीपीसीबी ने भी स्वीकार किया है, लेकिन पर्यावरण मंत्रालय में इस प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। दरअसल, सीपीसीबी ने 2017 में 27 जून को सभी बिना अनुमति और मानकों का पालन न करने वाले भट्ठों को बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद सभी तरह के भट्ठे बंद कर दिए गए थे।
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निर्णय ले सीपीसीबी : एनजीटी
- जिला गाजिायाबाद ईंट निर्माता समिति ने मांगी है भट्ठों के संचालन की अनुमति
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को गाजियाबाद में पर्यावरण के अनुकूल ईंट निर्माण का दावा करने वाले भट्ठों के संचालन पर जल्द निर्णय लेने का आदेश दिया है। पीठ ने कहा कि जिला गाजियाबाद ईंट निर्माता समिति का दावा है कि वह पारंपरिक भट्ठों में सरसों की भूसी को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करती है। इस ईंट निर्माण प्रक्रिया से पर्यावरण और सेहत को किसी तरह का नुकसान नहीं है। ऐसे में सीपीसीबी इस पहलू की जांच कर तत्काल निर्णय ले।
जस्टिस आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश में कहा कि सीपीसीबी समिति की ओर से उठाई गई मांगों पर गौर करे और यदि तकनीकी तौर पर उनका दावा सही है तो वह इन भट्ठों को संचालन की अनुमति दे। इस संबंध में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से भी अनुमति ली जानी चाहिए। समिति का दावा है कि वह फिक्स चिमनी युक्त बुल ट्रेंच किल्न (एफसीबीटीके) में सरसों की भूसी का इस्तेमाल ईंधन के तौर पर करती है। इस तरह ईंट निर्माण से पर्यावरण और लोगों की सेहत को किसी तरह का नुकसान नहीं है। इस तकनीकी को सीपीसीबी ने भी स्वीकार किया है, लेकिन पर्यावरण मंत्रालय में इस प्रस्ताव पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। दरअसल, सीपीसीबी ने 2017 में 27 जून को सभी बिना अनुमति और मानकों का पालन न करने वाले भट्ठों को बंद करने का आदेश दिया था। इसके बाद सभी तरह के भट्ठे बंद कर दिए गए थे।
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