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Patiala House Court : कोर्ट ने कहा- जिहादी साहित्य रखना या पढ़ना अपराध नहीं
Fri, 04 Nov 2022 05:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 04 Nov 2022 05:40 AM IST
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पटियाला हाउस कोर्ट
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दिल्ली की एक अदालत ने आतंकी संगठन आईएस की विचारधारा के प्रचार के खिलाफ नौ आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत आरोप तय कर दिए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि महज गैर प्रतिबंधित जिहादी साहित्य रखना कोई अपराध नहीं है। अदालत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दर्ज एक मामले पर सुनवाई कर रही थी।
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पटियाला हाउस कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि जिहादी साहित्य को रखना अपराध नहीं करार दिया जा सकता, क्योंकि इस तरह के साहित्य को कानून के किसी प्रावधान के तहत प्रतिबंधित नहीं किया गया है। ऐसा प्रस्ताव अनुच्छेद 19 के स्वतंत्रता और अधिकारों के खिलाफ है।
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अदालत ने आरोपी ओबैद हामिद मट्टा पर कहा कि वह कुछ कट्टर इस्लामी साहित्य को पढ़ रहा था, यह अपराध करने के बराबर नहीं है। हालांकि, वह गैरकानूनी गतिविधियों के कृत्यों में शामिल था और इसलिए यूएपीए के तहत उसने अपराध किए हैं।
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इन पर तय हुए आरोप
अदालत ने केरल, कर्नाटक व कश्मीर से जुड़े नौ आरोपी ओबैद मट्टा, मुशाब अनवर, रईस रशीद, एम एस मारला दीप्ति, मो. वकार लोन, मिर्जा सिद्दीकी, शिफा हारिस, हामिद मट्टा और अम्मार अब्दुल रहिमन के खिलाफ आरोप तय किए। हालांकि, अदालत ने 26 वर्षीय कश्मीरी युवक मुजमिल हसन भट को सभी आरोपों से बरी कर दिया।