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दिल्ली: भ्रष्टाचार में लिप्त एसआई की अदालत ने खारिज की जमानत याचिका, सीबीआई ने गिरफ्तार कर घर से बरामद किए थे एक करोड़ 20 लाख
Fri, 26 Nov 2021 10:46 PM IST
सुशील कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार
Updated Fri, 26 Nov 2021 10:46 PM IST
सार
अदालत ने कहा कि आरोपी दिल्ली पुलिस का एक अधिकारी रहा है जो आरोपी को जमानत आदेश को प्रभावित करने के लिए नोटिस मिलने के बावजूद अदालत के सामने पेश नहीं हुआ।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : एएनआई
विस्तार
अदालत ने भ्रष्टाचार मामले में लिप्त दिल्ली पुलिस के एक पूर्व उप निरीक्षक की जमानत याचिका खारिज कर दी। उस पर जमानत आदेश को प्रभावित करने के लिए अदालत की सुनवाई में पेश नहीं होने पर रिश्वत मांगने का आरोप है।
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विशेष न्यायाधीश शैलेंद्र मलिक ने मैदान गढ़ी पुलिस स्टेशन में तैनात एसआई भोगराज सिंह की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि कोई भी आरोपी जो भ्रष्ट आचरण करते हुए न्यायिक प्रक्रिया को एक या दूसरे तरीके से हराने का उपक्रम करता है उसे हल्केपन से नहीं लिया ज सकता। अदालत ने कहा यह एक साधारण नहीं, बल्कि गंभीर मामला है। उसे सीबीआई ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था।
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अदालत ने कहा कि आरोपी दिल्ली पुलिस का एक अधिकारी रहा है जो आरोपी को जमानत आदेश को प्रभावित करने के लिए नोटिस मिलने के बावजूद अदालत के सामने पेश नहीं हुआ। जांच एजेंसी ने उसके घर से तलाशी के दौरान एक करोड़ 12 लाख रुपये नगद बरामद हुए और वह बरामद राशि के बारे में स्पष्टीकरण नहीं दे पाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि एसआई भोजराज उनसे और उनके दोस्त अनुज से जांच में उनका पक्ष लेने के लिए पांच लाख रुपये की मांग कर रहा है। यह राशि जमानत पर सुनवाई के दौरान विरोध न करने के लिए पेश न होने पर मांगी थी।
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शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे डर था कि पुलिसकर्मी उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है और उसने सीबीआई अधिकारियों को आरोपी की पसंद के स्थान पर ही जाने का आग्रह किया था। सीबीआई की टीम ने साकेत में एक मॉल के पास जाल बिछाया और शिकायतकर्ता से रिश्वत के पैसे लेने के बाद एसआई भोगराज को गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के एक दिन बाद सीबीआई की टीम ने उसके घर पर छापा मारा और 1 करोड़ रुपये से अधिक बरामद की।
भोगराज के वकील ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता जिस आपराधिक मामले का सामना कर रहा था वे जमानती धाराओं में दर्ज किया गया था। ऐसे में उनके मुवक्किल को शिकायतकर्ता का पक्ष लेने या उनकी जमानत का विरोध करने का कोई कारण नहीं था। अदालत ने कहा रिकार्ड से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता की अग्रिम जमानत पर जांच अधिकारी को नोटिस जारी कर पक्ष रखने के लिए कहा था, लेकिन वह अदालत के समक्ष पेश नहीं हुआ। अदालत ने कहा शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच रिकॉर्ड की गई बातचीत से भी स्पष्ट है कि एसआई ने शिकायतकर्ता से कहा था कि वह जानबूझकर अदालत के सामने पेश नहीं हुआ क्योंकि वह उसे जमानत आदेश देना सुनिश्चित करना चाहता था।