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आम्रपाली समूह के निदेशक को जमानत देने से इनकार

Sat, 24 Jul 2021 11:55 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jul 2021 11:55 PM IST
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Court refuses to grant bail to amrapali group director
नई दिल्ली। अदालत ने निवेशकों और घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी से जुड़े करोड़ों के घोटाले के मामले में आम्रपाली समूह के निदेशक अजय कुमार को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा यह आरोप आर्थिक अपराधों की श्रेणी में आते हैं जो पूर्व नियोजित तरीके से किए जाते हैं।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरभि शर्मा वत्स ने जमानत आवेदन को खारिज करते हुए अपने फैसले में कहा कि आरोपी द्वारा पीड़ितों को धमकी देने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि इस मामले में मोटा धन शामिल है। आरोपी पर लगे आरोप सफेदपोश अपराध हैं और आर्थिक अपराधों की श्रेणी में आते हैं जो सामाजिक स्तर पर इसके परिणामों की परवाह किए व्यक्तिगत लाभ के लिए किए जाते हैं। आर्थिक अपराध अन्य अपराधों की तुलना में गंभीर हैं। ऐसे में आरोपी को जमानत प्रदान करना उचित नहीं होगा।
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इससे पूर्व शिकायतकर्ता अनुभव जैन की ओर से पेश अधिवक्ता गौरव दलाल ने अदालत को बताया कि दोनों पक्षकारों के बीच अनुबंध व लेन-देन 26 फ्लैटों की खरीद-फरोख्त के लिए हुआ था। इस मामले में आरोपियों को 6.6 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। बाद में यह बात प्रकाश में आई कि परियोजना के तहत फ्लैट बने ही नहीं थे।
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दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मेसर्स आम्रपाली सिलिकॉन सिटी प्राइवेट लिमिटेड और याची सहित अन्य निदेशकों व अधिकारियों के खिलाफ जैन की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया कि नवंबर 2011 में निदेशकों ने जैन से संपर्क किया था और वायदा किया कि वे सितंबर 2013 तक नोएडा के सेक्टर-76 में विकसित किए जाने वाले प्रोजेक्ट ‘आम्रपाली सिलिकॉन सिटी’ में टावर जी-1 में पूरी तरह से सुसज्जित 26 फ्लैटों उसे सौंप देंगे।

शिकायतकर्ता ने नवंबर 2011 में 6.6 करोड़ रुपये का पूरा भुगतान करके परियोजना में निवेश किया। उसने एक अनुबंध भी किया जिसके अनुसार फ्लैटों का कब्जा सितंबर 2013 तक दिया जाना था। पुलिस ने दावा किया कि टावर जी-1 को नोएडा प्राधिकरण ने मंजूरी नहीं दी थी, फिर भी आरोपियों ने फ्लैट बेचे/आवंटित किए। जमानत आवेदन में याची ने कहा कि उसे इस मामले में फर्जी तरीके से फंसाया गया है।
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