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जंतर मंतर पर नारेबाजी: अदालत ने दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाया
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नई दिल्ली। अदालत ने जंतर मंतर पर लगाए गए मुस्लिम विरोधी नारों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा पुलिस ने यूट्यूब न्यूज चैनल के एक रिपोर्टर से पूछताछ क्यों नहीं की जबकि वह लोगों को उकसाने के लिए जानबूझकर आपत्तिजनक सवाल उठाते हुए देखा जा रहा है।
हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की। पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल ने साथ ही आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक शनिवार तक बढ़ा दी।
अदालत ने यह टिप्पणियां आरोपी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के तर्क सुनने के बाद की। अधिवक्ता ने कहा कि जांच अधिकारी ने एक यूट्यूब न्यूज चैनल खबर इंडिया द्वारा किए गए इंटरव्यू पर भरोसा कर उनके मुवक्किल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले के जांच अधिकारी ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए चैनल के एक रिपोर्टर को आरोपी द्वारा जंतर मंतर पर दिए 11 मिनट के वीडियो की ट्रांसक्रिप्ट पेश की थी।
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अदालत ने जांच अधिकारी से पूछा कि क्या आपने रिपोर्टर को पूछताछ के लिए नोटिस दिया है। वीडियो में साफ है कि वह जानबूझकर प्रमुख प्रश्न उठाते हुए देखा जा रहा है। वह उन्हें उकसाने की कोशिश कर रहा है।
इतना ही नहीं अदालत ने आरोपी के अधिवक्ता से भी सवाल किया कि क्या वीडियो में कहे गए शब्द वास्तव में उनके मुवक्किल के हैं। अधिवक्ता जैन ने कहा शब्द उनके मुवक्किल के हैं लेकिन उसका इरादा हिंसा का नहीं था। यदि पूरे मामले को ध्यान से देखा जाए तो स्पष्ट है कि उनका मुवक्किल निर्दोष है। उन्होंने कहा उनके मुवक्किल का नाम प्राथमिकी में नहीं है और न ही उसने कोई नारे लगाए।
उन्होंने कहा जांच अधिकारी ने अपने मामले को मजबूत करने के लिए वीडियो का सहारा लिया है। जैन ने अदालत को बताया कि 11 मिनट के वीडियो में कथित तौर पर जो कुछ कहा गया है। उसके बावजूद आईपीसी की धारा 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कृत्य करना) के तहत मामला नहीं बनता। यह मामला अलग विचारों का है।
अधिवक्ता जैन ने कहा कि उनका मुवक्किल यदि अपमान और हिंसा भड़काने में शामिल होगा, तभी इसके दायरे में आएगा लेकिन ऐसा नहीं है।
वहीं अतिरिक्त लोक अभियोजक एस के काइन ने अग्रिम जमानत पर आपत्ति जताते हु कहा कि सभी तथ्यों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी विभिन्न धर्मों के बीच शत्रुता को बढ़ावा दे रहा है। आरोपियों द्वारा लोगों के दो गुटों को उकसाया जा रहा है। उन्होंने कहा यह गंभीर आरोप देश के खिलाफ है। आरोपी से पूछताछ करनी है ऐसे में जमानत आवेदन खारिज किया जाए।
अदालत ने 13 अगस्त को तीन अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने आरोपियों द्वारा 8 अगस्त को जंतर मंतर पर हुई नारेबाजी पर कहा था कि इस देश के नागरिक से अलोकतांत्रिक रवैये की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
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हिंदू रक्षा दल के अध्यक्ष पिंकी चौधरी की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित करते हुए अदालत ने यह टिप्पणी की। पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनिल अंतिल ने साथ ही आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक शनिवार तक बढ़ा दी।
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अदालत ने यह टिप्पणियां आरोपी की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के तर्क सुनने के बाद की। अधिवक्ता ने कहा कि जांच अधिकारी ने एक यूट्यूब न्यूज चैनल खबर इंडिया द्वारा किए गए इंटरव्यू पर भरोसा कर उनके मुवक्किल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले के जांच अधिकारी ने जमानत पर आपत्ति जताते हुए चैनल के एक रिपोर्टर को आरोपी द्वारा जंतर मंतर पर दिए 11 मिनट के वीडियो की ट्रांसक्रिप्ट पेश की थी।
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अदालत ने जांच अधिकारी से पूछा कि क्या आपने रिपोर्टर को पूछताछ के लिए नोटिस दिया है। वीडियो में साफ है कि वह जानबूझकर प्रमुख प्रश्न उठाते हुए देखा जा रहा है। वह उन्हें उकसाने की कोशिश कर रहा है।
इतना ही नहीं अदालत ने आरोपी के अधिवक्ता से भी सवाल किया कि क्या वीडियो में कहे गए शब्द वास्तव में उनके मुवक्किल के हैं। अधिवक्ता जैन ने कहा शब्द उनके मुवक्किल के हैं लेकिन उसका इरादा हिंसा का नहीं था। यदि पूरे मामले को ध्यान से देखा जाए तो स्पष्ट है कि उनका मुवक्किल निर्दोष है। उन्होंने कहा उनके मुवक्किल का नाम प्राथमिकी में नहीं है और न ही उसने कोई नारे लगाए।
उन्होंने कहा जांच अधिकारी ने अपने मामले को मजबूत करने के लिए वीडियो का सहारा लिया है। जैन ने अदालत को बताया कि 11 मिनट के वीडियो में कथित तौर पर जो कुछ कहा गया है। उसके बावजूद आईपीसी की धारा 153 ए (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कृत्य करना) के तहत मामला नहीं बनता। यह मामला अलग विचारों का है।
अधिवक्ता जैन ने कहा कि उनका मुवक्किल यदि अपमान और हिंसा भड़काने में शामिल होगा, तभी इसके दायरे में आएगा लेकिन ऐसा नहीं है।
वहीं अतिरिक्त लोक अभियोजक एस के काइन ने अग्रिम जमानत पर आपत्ति जताते हु कहा कि सभी तथ्यों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी विभिन्न धर्मों के बीच शत्रुता को बढ़ावा दे रहा है। आरोपियों द्वारा लोगों के दो गुटों को उकसाया जा रहा है। उन्होंने कहा यह गंभीर आरोप देश के खिलाफ है। आरोपी से पूछताछ करनी है ऐसे में जमानत आवेदन खारिज किया जाए।
अदालत ने 13 अगस्त को तीन अन्य आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने आरोपियों द्वारा 8 अगस्त को जंतर मंतर पर हुई नारेबाजी पर कहा था कि इस देश के नागरिक से अलोकतांत्रिक रवैये की अपेक्षा नहीं की जा सकती।