अदालत का आदेश : पुलिस वालों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करें आयुक्त, डीडीए को नोटिस
दुष्कर्म के एक मामले में दाखिल किए थे दो आरोप-पत्रों के दो अलग सेट। एक अन्य मामले में मास्टर प्लान-2021 के खिलाफ रेहड़ी-पटरी वालों की याचिका पर कोर्ट ने जवाब मांगा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अदालत ने दुष्कर्म के एक मामले में कथित रूप से दो आरोपपत्र दाखिल करने के मामले में जिम्मेदार पुलिस वालों पर कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश पुलिस आयुक्त को दिया है। अदालत ने इस मामले को पुलिस द्वारा अपने अधिकारों के दुरुपयोग का क्लासिक उदाहरण बताया। मामला जामिया नगर थाने से जुड़ा है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव राव ने इस तथ्य पर पुलिस के प्रति नाराजगी जाहिर की कि जो आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल हुआ और आरोपियों को दिया गया, वह उससे बिल्कुल अलग है जो सरकारी वकील और पीड़िता के वकील को दिया गया।
उन्होंने इस बात पर भी गौर किया कि दोनों ही आरोपपत्रों पर जांच अधिकारी, एसएचओ और एसीपी के एक जून 2021 को दस्तखत किए दिखाए गए हैं। जो आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया गया और आरोपी को दिया गया उसमें तथ्य कुछ और हैं जबकि जो आरोपपत्र सरकारी वकील और पीड़िता के वकील के पास हैं उनमें तथ्यों कुछ और हैं।
अदालत ने कहा कि आरोपपत्र के दो अलग सेट दाखिल करने पर झूठे तथ्य पेश करने, धोखाधड़ी और न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने का मामला बनता है। यह गंभीर श्रेणी का विश्वासघात है। जांच अधिकारी, एसएचओ और एसीपी का आचरण द्रोही और निंदनीय है। कोर्ट के साथ धोखाधड़ी की गई है। यह पुलिस द्वारा अधिकारों के दुरुपयोग का क्लासिक उदाहरण है। इसके अलावा पुलिस वालों ने आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को भी प्रभावित किया है। एजेंसी
दिल्ली विकास प्राधिकरण को कोर्ट का नोटिस
हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान 2021 के खिलाफ दायर याचिका पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) से जवाब मांगा है। नेशनल हॉकर्स फेडरेशन ने मास्टर प्लान को चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल एवं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने फेडरेशन की याचिका पर डीडीए को नोटिस जारी करते हुए पक्ष रखने का निर्देश दिया।
फेडरेशन ने याचिका में कहा कि दिल्ली मास्टर प्लान में स्ट्रीट वेंडर्स (प्रोटेक्शन ऑफ लाइवलीहुड एंड रेगुलेशन ऑफ स्ट्रीट वेंडिंग) एक्ट 2014 पर विचार नहीं किया गया है। याची का दावा है कि वह देशभर की रेहड़ी-पटरीवालों की 1188 यूनियनों की फेडरेशन है।
याचिका पर सुनवाई 12 जनवरी तय की गई है। फेडरेशन का कहना है कि स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 को प्रथम उद्देश्य रेहड़ी-पटरीवालों के लिए सहायक माहौल तैयार करना है ताकि वह अपना काम कर सकें। इसके ये सुनिश्चित करना कि इससे भीड़-भाड़ और सार्वजनिक स्थलों और गलियों में गंदगी न फैले।
ये प्लान वर्ष 2007 में स्वीकार कर लिया गया था लेकिन ऐसे प्रावधान है जो स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के तहत रेहड़ी-पटरी वालों के लिए तय शर्तों का उल्लेख नहीं करते।
अधिवक्ता कवलप्रीत कौर के जरिये याचिका दायर कर कहा है कि इस प्लान में अनौपचारिक क्षेत्र के लिए दिए प्रावधान साफ तौर पर मनमाने हैं और वे स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट का जिक्र तक नहीं करते जबकि इस कानून के तहत रेहड़ी-पटरी वालों के लिए योजना और टाउन वेंडिंग कमेटी बनाने की बात कही गई है।
याचिका में कहा गया है कि रेहड़ी-पटरी वाले राज्य की अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है और उनमें से अधिक सड़क पर कारोबार अपनी आजीविका चलाने के लिए विवश है क्योंकि सरकार शहरी गरीबों के लिए सम्मानजनक रोजगार मुहैया कराने में बुरी तरह नाकाम रही है। मास्टर प्लान से जब तक कानून विरोधी प्रावधानों को नहीं हटाया जाता तब तक रेहड़ी-पटरी वाले सुरक्षा होने के बावजूद परेशान होते रहेंगे। एजेंसी
डेढ़ सौ अधिक पटरी वाले हटाए गए
अवैध रेहड़ी-पटरीवालों पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद नई दिल्ली पालिका परिषद (एनडीएमसी) ने भी अवैध पटरी वालों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। बृहस्पतिवार सुबह से शाम तक अधिकारियों की मीटिंग का दौर चलता रहा। इस दौरान सरोजनी नगर मार्केट के पटरी वाले भी अपनी मांगे लेकर अधिकारियों के समक्ष पहुंचे।
हालांकि पिछले दिनों कार्रवाई कर कनॉट प्लेस से अधिकतर पटरी वाले हटा दिए गए। हालांकि शोरूम मालिकों का कहना है कि अवैध पटरी वालों की वजह से न केवल दिल्ली की छवि धूमिल होती है बल्कि रात के वक्त ग्राहकों को सुरक्षा की चिंता भी सताने लगती है।