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दिल्ली : अदालत ने दंगों के मामले में एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया
Sun, 23 Jan 2022 06:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 23 Jan 2022 06:30 AM IST
सार
अदालत ने कहा किसी भी शिकायतकर्ता व सार्वजनिक गवाह ने आरोपी की पहचान दंगा करने वाले या किसी गैरकानूनी सभा के सदस्य के रूप में नहीं की है।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।)
- फोटो : iStock
विस्तार
अदालत ने दिल्ली दंगों के मामले में एक आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा किसी भी शिकायतकर्ता व सार्वजनिक गवाह ने आरोपी की पहचान दंगा करने वाले या किसी गैरकानूनी सभा के सदस्य के रूप में नहीं की है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र भट ने कहा कि दो पुलिस गवाहों के बयान से संकेत मिलता है कि रोहित केवल वहां खड़ा था। अदालत ने कहा अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश करने में विफल रहा है। ऐसे में वह संदेह का लाभ पाने का हकदार है।
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अदालत ने कहा कि जिरह दोनों गवाहों ने कहा है कि आरोपी फरवरी 20 में दंगों के दौरान गोकलपुरी में उनसे 10 मीटर दूर खड़ा था। अदालत ने कहा विशेष लोक अभियोजक के उस तर्क को स्वीकार नहीं किया आरोपी को दंगाइयों के बीच देखा गया था।
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अभियोजन पक्ष ने कहा आरोपी जन्नती मस्जिद के पास था और उसे धारा 149 के तहत दोषी ठहराया जाना चाहिए। अदालत ने कहा किसी भी गवाह ने उसे बर्बरता, डकैती, आगजनी आदि करते हुए नहीं देखा। अदालत ने कहा किसी भी आरोपी को दोषी ठहराने के लिए ठोस साक्ष्य व बिना संदेह के उसका अपराध साबित करना जरूरी है।
इस मामले में ऐसा कुछ नहीं है जिसके आधार पर उसे दोषी ठहराया जा सके। उनका मानना है कि अभियोजन पक्ष बिना शक के अपराध साबित करने में असफल रहा है ऐसे में वे आरोपी को बरी करते है।