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तालीम : जेएनयू में अगले सत्र से आतंकवाद-रोधी पाठ, कुलपति ने कहा-निशाने पर कोई नहीं

Sat, 11 Sep 2021 05:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 11 Sep 2021 05:35 AM IST
सार

प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि क्लासरूम में पढ़ाई और चर्चा के दौरान तालिबान-अफगानिस्तान या किसी पड़ोसी देश का नाम आ सकता है। हालांकि, किसी को टारगेट करना मकसद नहीं है। 

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Counter terrorism studies in JNU from next session
जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार - फोटो : facebook.com/mamidalajagadesh.kumar

विस्तार

पांच सालों से एनआईआरएफ रैंकिंग में देश का दूसरा सर्वश्रष्ठ संस्थान का दर्जा प्राप्त जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय इन दिनों इंजीनियरिंग के छात्रों को प्रौद्योगिकी के साथ इंटरनेशनल स्ट्डीज में काउंटर टेररिज्म यानी आतंकवाद विरोध का नया कोर्स पढ़ाने के चलते विवादों में है। कोर्स का विषय बेशक देश-दुनिया के आज के माहौल को देखकर चौंकाने वाला नहीं है, लेकिन इंजीनियरिंग के छात्रों को इस कोर्स से जोड़ने का सवाल बार-बार उठता है। आखिर बीटेक डिग्री पाने वाले छात्रों को इस कोर्स को पढ़ाने की क्या जरूरत पड़ी, क्या छात्र पढ़ना पसंद करेंगे, इस विषय की पढ़ाई के बाद आखिर उनको भविष्य में क्या फायदा होगा आदि  सवाल हर किसी के जेहन में हैं। अमर उजाला के पाठक अक्सर इन सवालों के जवाब जानना चाहते थे। इन्हीं सवालों पर जेएनयू के कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार से सीमा शर्मा की बातचीतः- 

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बीटेक ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम किस तरह से डिजाइन किया गया है? 
देश में सामान्य बीटेक डिग्री प्रोग्राम के तहत इंजीनियरिंग की पढ़ाई करवायी जाती है। हालांकि, अधिकतर छात्र इंजीनियरिंग के बाद मैनेजमेंट समेत अन्य क्षेत्रों में अपनी मास्टर डिग्री पूरी करते हैं। नई शिक्षा नीति के तहत अब बहुविषयक पढ़ाई होगी। इसी को ध्यान में रखकर 2018 में बीटेक-एमएस ड्यूअल डिग्री प्रोग्राम का प्रस्ताव आया। इसके बाद अकेडमिक और एग्जीक्यूटिव काउंसिल में पास होने के बाद पहला बैच चल रहा है। इसमें पहले चार साल छात्र इंजीनियरिंग के विषयों को ही पढ़ेंगे। इसके बाद पांचवां साल एमएस के तहत पढ़ाई होगी। एमएस में ह्यूमेनेटीज, सोशल साइंस, लैंग्वेज, इंटरनेशनल रिलेशन आदि क्षेत्र में अपनी स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। फिलहाल एमएस में छात्रों के पास 11 कोर्स का विकल्प है। इसमें ही इंटरनेशनल रिलेशन कोर्स में % काउंटर टेररिज्म % विषय नाम से कोर्स को जोड़ा गया है। 
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क्लासरूम में तालिबान-अफगानिस्तान या किसी देश का भी जिक्र होगा? 
2022 से क्लासरूम में इंटरनेलशल स्ट्डीज के तहत काउंटर टेररिज्म में आतंकवाद विरोध की पहली क्लास होगी। लेकिन पाठ्यक्रम में किसी भी देश का जिक्र नहीं किया गया है। क्लासरूम में पढ़ाई और चर्चा के दौरान तालिबान-अफगानिस्तान या किसी पड़ोसी देश का नाम आ सकता है। हालांकि, किसी को टारगेट करना मकसद नहीं है। हालांकि छात्रों को क्लासरूम में यह बताया जाएगा कि आतंकवादी किस प्रकार प्रौद्योगिकी और तकनीक का प्रयोग देश को नुकसान पहुंचाने के लिए कर सकते हैं, ऐसी स्थिति में हमें किस प्रकार से तकनीक में आगे रहना होगा। 
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दोनों की अलग डिग्री मिलेगी? 
बीटेक-एमएस एक ड्यूअल  डिग्री है। नई शिक्षा नीति के तहत यदि कोई छात्र बीटेक के बाद एग्जिट करना चाहता होगा तो उसे बीटेक डिग्री दी जाएगी। वहीं, बीटेक-एमएस पूरा करने पर डिग्री में दोनों का प्रावधान होगा। छात्र को दो डिग्री मिलेगी। इसके अलावा उसके पास उसे सीधे पीएचडी करने का मौका भी मिलेगा। एमएस में प्रति सेमेस्टर 20 से 22 क्रेडिट लेने होंगे। इसमें11 विषयों का विकल्प होगा। यानी प्रति विषय तीन क्रेडिट रहेंगे। इस डिग्री धारक को नौकरी में उसका फायदा मिलेगा। वह इंजीनियरिंग, वित्त, विदेश मंत्रालय, दूतावास, मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर सकेगा।

काउंटर टेररिज्म के अलावा और कौन-कौन से विषयों को  पढ़ाया जाएगा?
एमएस में छात्र को इंटरनेशल रिलेशन में  काउंटर टेररिज् , इंडिया अमरजिंग वल्र्ड  व्यू इन 21 सेंचुरी, वर्ल्ड पॉलिटिक्स, फाउंडेशन कोर्स ऑफ ह्यूमन राइट,यूरोपियन पॉलिटिक्स,यूएन सिस्टम, यूरोपियन यूनियन आदि की पढ़ाई होगी। यदि कोई छात्र बीटेक -एमएस के बाद विदेश मंत्रालय या सरकार के अधीनस्थ विभागों के अलावा किसी विदेशी कंपनी में भी काम करता है तो उसे देश समेत विदेश नीति, पड़ोसी देशों की नीति, अन्य देशों के बारे में जानकारी होगी। इसका फायदा हर तरह से मिलेगा। 

कोरियन स्ट्डी में भी स्पेशलाइजेशन करवाया जा रहा है? 
सबसे पहले कोरियन स्ट्डी में स्पेशलाइजेशन करवाया जा रहा है। इसका छात्रों को बेहद फायदा हुआ है। दरअसल भारत में कोरियन कंपनी सबसे अधिक है, उदाहरण के तौर पर सैमसंग, एलजी, होंडा मोटर्स आदि। कोरियन सेंटर के माध्यम से छात्रों को कोरियन लैंग्वेज, उनकी संस्कृति, बिजनेस, कोरियन गवर्नमेंट सिस्टम आदि की जानकारी दी जाती है। इसका फायदा हुआ कि आज कोरियन कंपनी में इन्हीं बिंदुओं के कारण भारतीय युवा टॉप पॉजीशन पर काम  कर रहे हैं। 


हर क्षेत्र से इंजीनियर युवाओं को जोड़ने की योजना है? 
एमएस प्रोग्राम को स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज की टीम ने तीन महीनों में काउंटर टेरेरजिम डिजाइन किया है, ताकि डिग्री के बाद वो किसी भी क्षेत्र में अपना भविष्य बना सके। इसमें इंजीनियरिंग मैथ्मेटिक्स से वह फाइनेंस, लैंग्वेज टेक्नोलॉजी, इंवारयमेंटल साइंस के चलते क्लाइमेट चेंज, सिग्नीफिकेंट ऑफ साइंस एंड टेक् नोलॉजी  की पढ़ाई करवायी जाएगी। इसके माध्यम से डिग्रीधारक भविष्य में राजनायिक के रूप में काम  करता है तो  सोलर पावर, पेट्रोल-डीजल, ट्रेड नेगोसिएशन के बारे में अच्छा ज्ञान रहेगा। 

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