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Delhi News: थैलेसीमिया से पीड़ित महिलाओं की जिला अस्पताल में होगी काउंसलिंग
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थैलेसीमिया से पीड़ित महिलाओं की जिला अस्पताल में होगी काउंसलिंग
- अब तक हुई 800 महिलाओं की जांच, 10 मिलीं पॉजिटिव, पार्टनर के टेस्ट के लिए भी किया जाएगा प्रेरित
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जल्द ही जिला अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित महिलाओं की विशेष काउंसलिंग शुरू होगी। महिला विभाग की एचओडी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। काउंसलिंग के दौरान इन महिलाओं को बताया जाएगा कि थैलेसीमिया की रिपोर्ट पॉजिटिव आने का क्या मतलब होता है। साथ ही, उनसे बच्चे को बीमारी होने की कितनी संभावना रहती है।
अस्पताल प्रशासन की कोशिश रहेगी कि इन महिलाओं के पार्टनर का भी थैलेसीमिया टेस्ट कराया जाए, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है जो माता-पिता से जीन के माध्यम से बच्चे में आती है। यह एक रक्त विकार है, जिसमें शरीर सामान्य से कम हीमोग्लोबिन बनाता है। यदि दोनों पैरेंट्स में थैलेसीमिया ट्रेट (वाहक) पॉजिटिव पाया जाता है, तो बच्चे को मेजर थैलेसीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अस्पताल की ओर से काउंसलिंग शुरू करने पर काम शुरू किया गया है।
इसी को ध्यान में रखते हुए जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ ओपीडी में आने वाली सामान्य महिलाओं का भी थैलेसीमिया टेस्ट किया जा रहा है। अस्पताल में महिलाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए चाइल्ड पीजीआई की लैब में भेजे जा रहे हैं। इस कार्यक्रम पर दोनाें अस्पताल मिलकर काम कर रहे हैं। अस्पताल के अनुसार, अब तक लगभग 800 महिलाओं के सैंपल की जांच की जा चुकी है, जिनमें से करीब 10 महिलाएं थैलेसीमिया पॉजिटिव पाई गई हैं। अब इन महिलाओं की व्यक्तिगत काउंसलिंग की जाएगी ताकि वे बीमारी से जुड़ी आवश्यक जानकारी समझ सकें और आगे की सावधानियां बरत सकें।
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अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि थैलेसीमिया को समय रहते पहचाना बेहद जरूरी है। पीड़ित महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें जागरूक होकर सही कदम तय उठाने की जरूरत है।
सीएमएस डॉ. अजय राणा ने बताया कि पॉजिटिव मिली महिलाओं की काउंसलिंग की जाएगी। उनको इस बीमारी के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। महिलाओं को गर्भधारण की योजना बनाने से पूर्व थैलेसीमिया की जांच अवश्य करानी चाहिए।
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- अब तक हुई 800 महिलाओं की जांच, 10 मिलीं पॉजिटिव, पार्टनर के टेस्ट के लिए भी किया जाएगा प्रेरित
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। जल्द ही जिला अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित महिलाओं की विशेष काउंसलिंग शुरू होगी। महिला विभाग की एचओडी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। काउंसलिंग के दौरान इन महिलाओं को बताया जाएगा कि थैलेसीमिया की रिपोर्ट पॉजिटिव आने का क्या मतलब होता है। साथ ही, उनसे बच्चे को बीमारी होने की कितनी संभावना रहती है।
अस्पताल प्रशासन की कोशिश रहेगी कि इन महिलाओं के पार्टनर का भी थैलेसीमिया टेस्ट कराया जाए, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके। थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है जो माता-पिता से जीन के माध्यम से बच्चे में आती है। यह एक रक्त विकार है, जिसमें शरीर सामान्य से कम हीमोग्लोबिन बनाता है। यदि दोनों पैरेंट्स में थैलेसीमिया ट्रेट (वाहक) पॉजिटिव पाया जाता है, तो बच्चे को मेजर थैलेसीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अस्पताल की ओर से काउंसलिंग शुरू करने पर काम शुरू किया गया है।
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इसी को ध्यान में रखते हुए जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ ओपीडी में आने वाली सामान्य महिलाओं का भी थैलेसीमिया टेस्ट किया जा रहा है। अस्पताल में महिलाओं के सैंपल लेकर जांच के लिए चाइल्ड पीजीआई की लैब में भेजे जा रहे हैं। इस कार्यक्रम पर दोनाें अस्पताल मिलकर काम कर रहे हैं। अस्पताल के अनुसार, अब तक लगभग 800 महिलाओं के सैंपल की जांच की जा चुकी है, जिनमें से करीब 10 महिलाएं थैलेसीमिया पॉजिटिव पाई गई हैं। अब इन महिलाओं की व्यक्तिगत काउंसलिंग की जाएगी ताकि वे बीमारी से जुड़ी आवश्यक जानकारी समझ सकें और आगे की सावधानियां बरत सकें।
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अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि थैलेसीमिया को समय रहते पहचाना बेहद जरूरी है। पीड़ित महिलाओं को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें जागरूक होकर सही कदम तय उठाने की जरूरत है।
सीएमएस डॉ. अजय राणा ने बताया कि पॉजिटिव मिली महिलाओं की काउंसलिंग की जाएगी। उनको इस बीमारी के बारे में विस्तार से बताया जाएगा। महिलाओं को गर्भधारण की योजना बनाने से पूर्व थैलेसीमिया की जांच अवश्य करानी चाहिए।