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कैशलेस चिकित्सा सुविधा मामले में निगम को फटकार

Sat, 04 Dec 2021 01:06 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 04 Dec 2021 01:06 AM IST
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Corporation reprimanded in cashless medical facility case
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने सदस्यता शुल्क जमा करने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए ‘कैशलेस चिकित्सा सेवाओं’ की मांग याचिका पर विरोधाभासी जवाब देने पर नगर निगम के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष अखिल दिल्ली प्रथम शिक्षक संघ द्वारा याचिका दायर की गई है।
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याचिका में आग्रह किया गया है कि प्रचलित व्यवस्था के बजाय निगम को अस्पताल में सीधे भुगतान का निर्देश दिया जाए। वर्तमान में एक सेवानिवृत्त कर्मचारी पहले चिकित्सा उपचार के लिए भुगतान करता है और बाद में एमसीडी के स्वास्थ्य विभाग द्वारा उसे पैसे वापस (प्रतिपूर्ति) किए जाते हैं।
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अधिवक्ता रंजीत शर्मा ने कहा कि निर्देश आवश्यक है क्योंकि अस्पताल में दिए गए बिल की राशि की सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वापसी में निगम को बहुत लंबा समय लगता है। उन्होंने पीठ को बताया कि निगम का आचरण उसकी अपनी (संशोधित) योजना के विपरीत है। बशर्ते पेंशनभोगियों से शुल्क लिए बिना निगम द्वारा बिलों का सीधे भुगतान किया जाएगा।
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पीठ ने कहा एमसीडी ने अपने हलफनामे में कैशलैस सेवा के स्थान पर ‘प्रतिपूर्ति’ शब्द का इस्तेमाल किया है। यह बयान विरोधाभासी है। शिकायत यह है कि संशोधित योजना के तहत बिल सीधे आपके पास आएंगे और आप पेंशनभोगियों से बिना चार्ज किए भुगतान करेंगे, लेकिन आप प्रतिपूर्ति शब्द का बहुत ही ढीला उपयोग कर रहे हैं। जवाब में विरोधाभास है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा चिकित्सा बिलों का भुगतान किस तरीके से किया जाना है यह एक नीतिगत निर्णय है। इसमें न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। अदालत ने मामले की सुनवाई अब 27 अप्रैल 2022 तय की है। अदालत ने निगम को अपना नया जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

पिछले साल दिसंबर में दायर याचिका में कहा गया था कि बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मचारियों, जिन्हें समय पर पेंशन नहीं मिली, को अपने इलाज के लिए पैसे की व्यवस्था करने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा क्योंकि अस्पतालों ने कोविड -19 महामारी के दौरान कैशलैस उपचार प्रदान नहीं किया।
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