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लोगों की लापरवाही: विशेषज्ञ बोले, दिल्ली-महाराष्ट्र में सबसे पहले मिल सकती है कोरोना की नई लहर की झलक
Wed, 07 Jul 2021 12:29 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 07 Jul 2021 12:29 AM IST
सार
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहारिया का कहना है कि दिल्ली में पहले से ही कोविड नियमों को लेकर अलग रणनीति दिखाई दे रही है। एक साथ सबकुछ छूट देना काफी खतरनाक हो सकता था जिसके परिणाम अभी देखने को मिल रहे हैं।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्वोत्तर राज्यों में कोरोना महामारी के मामले बढ़ने लगे हैं। जबकि देश की राजधानी में नए मामले कम हैं लेकिन यहां कोविड सतर्कता नियमों को लेकर काफी लापरवाहियां भी देखने को मिल रही हैं। इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस भीड़ के बीच ताकतवर हो रहा है। अगर जल्द ही लोगों ने सबक नहीं लिया तो आगे परेशानी काफी बढ़ सकती है।
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहारिया का कहना है कि दिल्ली में पहले से ही कोविड नियमों को लेकर अलग रणनीति दिखाई दे रही है। एक साथ सबकुछ छूट देना काफी खतरनाक हो सकता था जिसके परिणाम अभी देखने को मिल रहे हैं।
ज्यादातर इलाके खुल चुके हैं और वहां कोविड सतर्कता नियमों का उल्लंघन भी देखने को मिल रहा है। सड़कों पर ट्रैफिक जाम और बाजारों में लोगों की खचाखच भीड़ एक गंभीर संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।
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दरअसल कोविड सतर्कता नियमों को नहीं मानने और भीड़ बढ़ने की वजह से पिछले एक सप्ताह में अलग-अलग छह से ज्यादा बाजारों को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है। पहले पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर, फिर नांगलोई और अब लाजपत नगर, सदर बाजार इत्यादि को कुछ दिन के लिए बंद किया गया।
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जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. चंद्रकांत लहारिया का कहना है कि दिल्ली में पहले से ही कोविड नियमों को लेकर अलग रणनीति दिखाई दे रही है। एक साथ सबकुछ छूट देना काफी खतरनाक हो सकता था जिसके परिणाम अभी देखने को मिल रहे हैं।
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ज्यादातर इलाके खुल चुके हैं और वहां कोविड सतर्कता नियमों का उल्लंघन भी देखने को मिल रहा है। सड़कों पर ट्रैफिक जाम और बाजारों में लोगों की खचाखच भीड़ एक गंभीर संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।
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दरअसल कोविड सतर्कता नियमों को नहीं मानने और भीड़ बढ़ने की वजह से पिछले एक सप्ताह में अलग-अलग छह से ज्यादा बाजारों को अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है। पहले पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर, फिर नांगलोई और अब लाजपत नगर, सदर बाजार इत्यादि को कुछ दिन के लिए बंद किया गया।
इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़ पर नियंत्रण लगाने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे। साथ ही लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए। वहीं एक अन्य विशेषज्ञ डॉ. दिव्येंदु साहा ने बताया कि लोगों से बार-बार अपील के बाद भी स्थिति वही भयावह तस्वीरों वाली है।
ऐसा लगता है जैसे लोग कुछ सुनना या फिर समझना ही नहीं चाहते हैं। इसे रोकने के लिए नियमों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टिकोण के लिहाज से सरकार का बाजार खोलने का फैसला सही हो सकता है लेकिन महामारी के लिहाज से यह तब तक जल्दबाजी है जबतक कि टीकाकरण 60 फीसदी आबादी को पूरा न कर ले।
ऐसा लगता है जैसे लोग कुछ सुनना या फिर समझना ही नहीं चाहते हैं। इसे रोकने के लिए नियमों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टिकोण के लिहाज से सरकार का बाजार खोलने का फैसला सही हो सकता है लेकिन महामारी के लिहाज से यह तब तक जल्दबाजी है जबतक कि टीकाकरण 60 फीसदी आबादी को पूरा न कर ले।