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एम्स में तीन दिन से पड़े कोरोना मरीजों के शव

Thu, 29 Apr 2021 01:25 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 29 Apr 2021 01:25 AM IST
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corona dead bodies lying in trauma centers for last three days
नई दिल्ली। दिल्ली एम्स में तीन दिन से कोरोना मरीजों के शव मोर्चरी में पड़े हैं। हर दिन सुबह ट्रामा सेंटर पहुंच कर तीमारदार शव लेने का इंतजार करते हैं ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके लेकिन ग्रीन पार्क और एम्स प्रबंधन के बीच मनमाने नियम इन लोगों के लिए आफत बन चुके हैं। ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट पर कहा जा रहा है कि प्राइवेट एंबुलेंस में अगर किसी शव को लाएंगे तो अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। जबकि एम्स प्रबंधन के अनुसार उनके पास शवों को ले जाने के लिए सीमित सुविधा है। इसमें अधिक वक्त लग सकता है।
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दिल्ली में प्रवासी मजदूर राजकुमार ने बताया कि उनकी पत्नी की मौत दो दिन पहले ट्रामा सेंटर में हुई है लेकिन उन्हें अब तक शव नहीं मिला है। अगले दिन का बोलकर ट्रामा सेंटर के कर्मचारी बुलाते हैं और अपने मन से ही लिस्ट को फाड़ देते हैं। इसकी वजह से उन्हें शव नहीं मिल पा रहा है। श्मशान घाट वाले प्राइवेट एंबुलेंस से आए शव स्वीकार नहीं कर रहे हैं। ट्रामा सेंटर वाले कह रहे हैं कि एंबुलेंस नहीं है। ऐसे में शव को कैसे लेकर जाएं? बुधवार को भी राजकुमार शव लेकर नहीं जा सके।
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उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ निवासी चंदन कुमार ने बताया कि उनके मामा विजय का तीन दिन पहले कोरोना वायरस की वजह से निधन हो चुका है। वह उत्तम नगर में रहते थे। 26 अप्रैल को अपने मामा का शव लेने के लिए वह एम्स ट्रामा सेंटर पहुंचे हैं। वहां सुबह से शाम तक बस इसी का इंतजार करते हैं कि कोई उन्हें आवाज दे और शव सौंप दे। मंगलवार को मोर्चरी के बाहर कर्मचारियों ने उनसे कहा कि बुधवार को सुबह आकर शव ले जाना लेकिन जब वे अगले दिन पहुंचे तो शाम तक उन्हें नहीं बुलाया गया। एक बार फिर वह मायूस होकर अपने घर वापस लौट आए।
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चंदन का आरोप है कि एम्स के ट्रामा सेंटर में जो वीआईपी लोग हैं उन्हें पूरा उपचार मिल रहा है जबकि सामान्य लोगों से यहां के कर्मचारी गलत व्यवहार करते हैं। बुधवार की शाम को उन्होंने 100 नंबर पर पुलिस को फोन लगाया तो वहां चौकी से पुलिस जवान पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने आकर लोगों की परेशानी नहीं पूछी बल्कि इधर उधर की बात करके चले गए। चंदन कुमार का कहना है कि कोरोना वायरस से उनके मामा की मौत हो गई लेकिन कम से कम शव तो उन्हें सौंप दिया जाए।
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