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दिल्ली के 50 अस्पताल कोविड मुक्त: इन अस्पतालों में संक्रमण का एक भी मरीज भर्ती नहीं, तीन माह बाद खाली हुए अस्पताल
Mon, 28 Jun 2021 11:15 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 28 Jun 2021 11:15 PM IST
सार
विशेषज्ञों का कहना है कि अब दूसरी लहर पूरी तरह खत्म हो चुकी है। जो कुछ संक्रमित मिल रहे हैं, उनमें हल्के लक्षण है। यही कारण है कि नए मामले अस्पतालों में नहीं आ रहे हैं, जो एक राहत की बात है।
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फाइल फोटो
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
राजधानी में स्वास्थ्य कर्मचारियों की मेहनत रंग ला रही है। कोरोना के मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं। इससे अब दिल्ली के 50 अस्पताल कोविड मुक्त हो चुके हैं। यहां संक्रमण का कोई भी मरीज अब भर्ती नहीं है। तीन महीने बाद इन अस्पतालों में अब राहत की सांस ली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब दूसरी लहर पूरी तरह खत्म हो चुकी है। जो कुछ संक्रमित मिल रहे हैं, उनमें हल्के लक्षण है। यही कारण है कि नए मामले अस्पतालों में नहीं आ रहे हैं, जो एक राहत की बात है। दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में कोरोना की लहर शुरू हो गई थी। 12 अप्रैल तक अस्पतालों में 6 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हो गए थे। 22 अप्रैल के बाद हालात खराब होने लगे थे, और भर्ती मरीजों की संख्या 19 हजार को पार कर गई थी।
आलम यह था कि सभी बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड भर गए थे, लेकिन अब करीब तीन महीने बाद अस्पतालों में एक हजार से कम मरीज भर्ती हैं, और 26 हजार से ज्यादा बेड खाली हैं। दिल्ली के 50 अस्पतालों में अब कोरोना का कोई मरीज भर्ती नहीं है।
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इनके अलावा बाकी जो अस्पताल हैं उनके केवल आईसीयू में ही कोरोना के मरीज भर्ती हैं। कुल 6652 आईसीयू बेड में से 527 पर मरीज भर्ती है और 6125 खाली है। यानी, 92 फीसदी आईसीयू बेड भी खाली हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 50 अस्पतालों में कोविड के मरीज अब नहीं है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि अब दूसरी लहर पूरी तरह खत्म हो चुकी है। जो कुछ संक्रमित मिल रहे हैं, उनमें हल्के लक्षण है। यही कारण है कि नए मामले अस्पतालों में नहीं आ रहे हैं, जो एक राहत की बात है। दिल्ली में मार्च के आखिरी सप्ताह में कोरोना की लहर शुरू हो गई थी। 12 अप्रैल तक अस्पतालों में 6 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हो गए थे। 22 अप्रैल के बाद हालात खराब होने लगे थे, और भर्ती मरीजों की संख्या 19 हजार को पार कर गई थी।
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आलम यह था कि सभी बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड भर गए थे, लेकिन अब करीब तीन महीने बाद अस्पतालों में एक हजार से कम मरीज भर्ती हैं, और 26 हजार से ज्यादा बेड खाली हैं। दिल्ली के 50 अस्पतालों में अब कोरोना का कोई मरीज भर्ती नहीं है।
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इनके अलावा बाकी जो अस्पताल हैं उनके केवल आईसीयू में ही कोरोना के मरीज भर्ती हैं। कुल 6652 आईसीयू बेड में से 527 पर मरीज भर्ती है और 6125 खाली है। यानी, 92 फीसदी आईसीयू बेड भी खाली हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 50 अस्पतालों में कोविड के मरीज अब नहीं है।
इसको देखते हुए इन अस्पतालों में रूटीन सर्जरी के साथ-साथ अन्य गंभीर मरीजों का भी इलाज शुरू किया जा रहा है। कोविड के मामले कम होने के बाद अब पोस्ट कोविड समस्याओं के मरीज भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। जो मरीज भर्ती हैं, उनमें अन्य गंभीर रोगों के अलावा पोस्ट कोविड वाले ही मरीज हैं।
अधिक सतर्क रहने की जरूरत
वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर कमलजीत सिंह कैंथ बताते हैं कि लंबे लॉकडाउन और कोरोना से बचाव के नियमों के पालन से दिल्ली में कोरोना से हालात नियंत्रण में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि वायरस का प्रसार तो अब थम गया है, लेकिन तीसरी लहर का खतरा भी है। इसलिए जरूरी है कि लोग नियमों का पालन करें, क्योकि वायरस के बदलने पर किसी का नियंत्रण नहीं है, लेकिन उससे बचाव करना लोगों के हाथ में हैं। अब लापरवाही बरती तो परिणाम घातक हो सकते हैं।
दो बड़े सरकारी अस्पतालों में 30 फीसदी मरीज
दिल्ली के दो बड़े सरकारी अस्पताल लोकनायक और जीटीबी में मिलाकर 350 से अधिक मरीज भर्ती हैं। इस लिहाज से देखें तो कुल मरीजों में से 30 फीसदी का इलाज इन्हीं दोनों अस्पतालों में चल रहा है।
अधिक सतर्क रहने की जरूरत
वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर कमलजीत सिंह कैंथ बताते हैं कि लंबे लॉकडाउन और कोरोना से बचाव के नियमों के पालन से दिल्ली में कोरोना से हालात नियंत्रण में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि वायरस का प्रसार तो अब थम गया है, लेकिन तीसरी लहर का खतरा भी है। इसलिए जरूरी है कि लोग नियमों का पालन करें, क्योकि वायरस के बदलने पर किसी का नियंत्रण नहीं है, लेकिन उससे बचाव करना लोगों के हाथ में हैं। अब लापरवाही बरती तो परिणाम घातक हो सकते हैं।
दो बड़े सरकारी अस्पतालों में 30 फीसदी मरीज
दिल्ली के दो बड़े सरकारी अस्पताल लोकनायक और जीटीबी में मिलाकर 350 से अधिक मरीज भर्ती हैं। इस लिहाज से देखें तो कुल मरीजों में से 30 फीसदी का इलाज इन्हीं दोनों अस्पतालों में चल रहा है।
ये अस्पताल हुए कोविड मुक्त
- सरदार पटेल कोविड केंद्र
- इंदिरा गांधी अस्पताल(द्वारका)
- जनकपुरी सुपरस्पेशयलिटी अस्पताल
- आचार्य भिक्षु अस्पताल
- ईएसआई अस्पताल( झिलमिल)
- विम्हंस अस्पताल
- बालाजी अस्पताल( पश्चिम विहार)
- महाराजा अग्रसेन अस्पताल(पंजाबी बाग)
- मैक्स( पटपडगंज)
- सर गंगाराम सिटी अस्पताल
- फोर्टिस( ओखला)
- फोर्टिस( शालीमार बाग)
- पार्क अस्पताल
- पुष्पावती अस्पताल
- बत्रा अस्पताल
- कालरा अस्पताल
- सत्यभामा अस्पताल
- सरोज अस्पताल
- दिल्ली हर्ट एवं लंग्स इस्टीट्यूट
- कुकरेजा अस्पताल
- मधुकर अस्पताल
- सिग्नस अस्पताल
- तीर्थ राम अस्पताल
- शांति मुकुंद अस्पताल
- आयुष्मान अस्पताल
- धर्मशिला अस्पताल
- संत परमानंद अस्पताल
- मूलचंद अस्पताल
- गोयल अस्पताल
- मेट्रो अस्पताल
- रिवाइव अस्पताल
- मेडस्टार अस्पताल
- ब्रहम शक्ति अस्पताल
- आर्य अस्पताल
- सुशीला अस्पताल
- महाराजा अग्रसेन अस्पताल( द्वारका)
- भगवान महावीर अस्पताल
- पुष्पांजलि अस्पताल
- पंचशील अस्पताल
- दिल्ली मेडकिल सेंटर
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नोट- आंकड़े स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक हैं