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आठ वर्षीय बच्चे से अप्राकृतिक कृत्य के दोषी की सजा बरकरार
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नइ दिल्ली। अदालत ने आठ वर्षीय बच्चे से अप्राकृतिक कृत्य के दोषी धर्मेंद्र की सजा को बरकरार रखा है। हालांकि अदालत ने उसे राहत देते हुए तीन वर्ष की सजा को घटाकर 18 माह यानि आधा कर दिया। अदालत ने कहा घटना के समय दोषी की उम्र लगभग 19 वर्ष थी, और वह एक अनपढ़ व्यक्ति है।
मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के मई 2019 के उस फैसले को दोषी धर्मेंद्र ने चुनौती दी थी जिसमें उसे इस आरोप में तीन वर्ष कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने उसे यह राशि पीड़ित बच्चे को देने का निर्देश दिया था।
प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने सजा के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि नाबालिग पीड़ित की गवाही से उसका अपराध बिना शक साबित हुआ है। उन्होंने दोषी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि गवाह को सिखाया गया है और उसे झूठे मामले में फंसाने का कोई मकसद था।
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न्यायाधीश ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है जहां दोषी ने नाबालिग लड़के के साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया और उसे अत्यधिक शारीरिक और मानसिक पीड़ा दी। अदालत ने उसकी जेल की अवधि को कम करते हुए कहा घटना के समय अपीलकर्ता की आयु लगभग 19 वर्ष थी, और वह एक अनपढ़ व्यक्ति है। ऐसे में वे सजा घटाकर 18 माह की अवधि करते हैं।
पुलिस के अनुसार दोषी एक दैनिक वेतन भोगी था और आठ महीने और 13 दिनों की जेल की सजा काट चुका है। उसे जून 2008 में न्यायिक हिरासत में भेजा गया और फरवरी 2009 में जमानत पर रिहा कर दिया गया। मामला पश्चिमी दिल्ली इलाके का है।
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मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के मई 2019 के उस फैसले को दोषी धर्मेंद्र ने चुनौती दी थी जिसमें उसे इस आरोप में तीन वर्ष कैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने उसे यह राशि पीड़ित बच्चे को देने का निर्देश दिया था।
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प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने सजा के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि नाबालिग पीड़ित की गवाही से उसका अपराध बिना शक साबित हुआ है। उन्होंने दोषी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि गवाह को सिखाया गया है और उसे झूठे मामले में फंसाने का कोई मकसद था।
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न्यायाधीश ने कहा कि यह एक ऐसा मामला है जहां दोषी ने नाबालिग लड़के के साथ अप्राकृतिक यौनाचार किया और उसे अत्यधिक शारीरिक और मानसिक पीड़ा दी। अदालत ने उसकी जेल की अवधि को कम करते हुए कहा घटना के समय अपीलकर्ता की आयु लगभग 19 वर्ष थी, और वह एक अनपढ़ व्यक्ति है। ऐसे में वे सजा घटाकर 18 माह की अवधि करते हैं।
पुलिस के अनुसार दोषी एक दैनिक वेतन भोगी था और आठ महीने और 13 दिनों की जेल की सजा काट चुका है। उसे जून 2008 में न्यायिक हिरासत में भेजा गया और फरवरी 2009 में जमानत पर रिहा कर दिया गया। मामला पश्चिमी दिल्ली इलाके का है।