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आरटीई कानून में संशोधन न करने पर शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ अवमानना याचिका
Mon, 01 Mar 2021 08:49 PM IST
नोएडा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 01 Mar 2021 08:49 PM IST
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शिक्षा के अधिकार अधिनियम
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शिक्षा के अधिकार (आरटीई) कानून में संशोधन न करने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है। निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग व विशेष वर्ग के छात्रों को 12वीं कक्षा तक निशुल्क शिक्षा प्रदान करने के लिए आरटीई में संशोधन किया जाना था। याचिका में कहा गया है कि अदालत के आदेश के बाद भी संशोधन न करने से लाखों बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है और वे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।
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सोशल ज्यूरिस्ट सिविल राइट ग्रुप की ओर से अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने यह याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि आरटीई के तहत आठवीं कक्षा तक के बच्चों को ही निशुल्क शिक्षा का प्रावधान है। ऐसे में निजी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों को आठवीं पास करते ही स्कूल प्रशासन या तो फीस जमा करवाने के लिए कहता है या फिर स्कूल आने से मना कर दिया जाता है।
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उन्होंने कहा कि पिछले शैक्षणिक सत्र में करीब एक लाख बच्चों को सरकारी स्कूल में जाने के लिए मजबूर कर दिया गया क्योंकि उनके अभिभावक निजी स्कूल की फीस देने में असमर्थ हैं। याची ने कहा कि हर वर्ष यही हालत हैं। अदालत ने 9 दिसंबर 2019 को सरकार से आरटीई में संशोधन करने के लिए कहा था ताकि आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग व विशेष वर्ग के बच्चे 12वीं तक निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकें।
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उन्होंने कहा कि यह इस कारण भी जरूरी है क्योंकि आठवीं तक ये बच्चे अंग्रेजी मीडियम में शिक्षा पाते हैं लेकिन सरकारी स्कूल में उस प्रकार की सुविधा नहीं होती। अधिवक्ता अग्रवाल ने कहा कि अदालत के आदेश को एक वर्ष से ज्यादा समय हो गया है लेकिन सरकार ने आदेश का पालन नहीं किया। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।