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1500 युवकों से ठगी का मास्टरमाइंड धरा
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नई दिल्ली। आईजीआई एयरपोर्ट थाना पुलिस ने ठगी करने वाले गैंग का पर्दाफाश कर गिरोह के मास्टरमाइंड राजेंद्र मलिक को भुवनेश्वर से गिरफ्तार किया है। आरोपी एयरपोर्ट संचालक कंपनी की फर्जी वेबसाइट बनाकर बेरोजगार युवकों के साथ ठगी करते थे। ये तक करीब 1500 बेरोजगार युवकों से 15 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी कर चुके हैं। पुलिस इसके दो साथियों की तलाश कर रही है।
आईजीआई एयरपोर्ट जिला डीसीपी राजीव रंजन ने बताया कि एयरपोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी जीएमआर ने नवंबर महीने में शिकायत दी थी कि कोई कंपनी की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी कर रहा है। ज्यादातर बेरोजगार युवकों से ठगी की जा रही है। युवकों से आवेदन करने के नाम पर एक-एक हजार रुपये लिए जा रहे हैं। मामले की जांच इंस्पेक्टर अजय कुमार को सौंपी गई। इंस्पेक्टर अजय कुमार ने रसूलगढ़, भुवनेश्वर से आरोपी राजेंद्र मलिक को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इसके पास से तीन एटीएम स्वाइप मशीन, एक प्रिंटर, दो मोबाइल फोन, 18 सिमकार्ड और एक लैपटॉप बरामद किया है।
डीसीपी राजीव रंजन ने बताया कि आरोपी का कहना है कि वह दीपक साहू के साथ मिलकर भुवनेश्वर में इंस्टीट्यूट ऑफ एकाउंट एंड फाइनेंस मैनेजमेंट चलाता था। साथ में वह लोगों की जीएसटी रिटर्न, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड व आधार कार्ड आदि बनवाता था। बाद में ये प्रमोद कुमार साहू के संपर्क में आया। उससे इसने वेब डिजाइनिंग सीखी। लॉकडाउन के दौरान इन्होंने ठगी करने की साजिश रची। इन्होंने जीएमआर की फर्जी वेबसाइट बनाई और नौकरी का झांसा देकर ठगने लगे। ये बेरोजगार युवकों से रजिस्ट्रेशन शुल्क व अन्य के नाम पर पैसा ठगते थे।
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आईजीआई एयरपोर्ट जिला डीसीपी राजीव रंजन ने बताया कि एयरपोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी जीएमआर ने नवंबर महीने में शिकायत दी थी कि कोई कंपनी की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी कर रहा है। ज्यादातर बेरोजगार युवकों से ठगी की जा रही है। युवकों से आवेदन करने के नाम पर एक-एक हजार रुपये लिए जा रहे हैं। मामले की जांच इंस्पेक्टर अजय कुमार को सौंपी गई। इंस्पेक्टर अजय कुमार ने रसूलगढ़, भुवनेश्वर से आरोपी राजेंद्र मलिक को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इसके पास से तीन एटीएम स्वाइप मशीन, एक प्रिंटर, दो मोबाइल फोन, 18 सिमकार्ड और एक लैपटॉप बरामद किया है।
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डीसीपी राजीव रंजन ने बताया कि आरोपी का कहना है कि वह दीपक साहू के साथ मिलकर भुवनेश्वर में इंस्टीट्यूट ऑफ एकाउंट एंड फाइनेंस मैनेजमेंट चलाता था। साथ में वह लोगों की जीएसटी रिटर्न, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड व आधार कार्ड आदि बनवाता था। बाद में ये प्रमोद कुमार साहू के संपर्क में आया। उससे इसने वेब डिजाइनिंग सीखी। लॉकडाउन के दौरान इन्होंने ठगी करने की साजिश रची। इन्होंने जीएमआर की फर्जी वेबसाइट बनाई और नौकरी का झांसा देकर ठगने लगे। ये बेरोजगार युवकों से रजिस्ट्रेशन शुल्क व अन्य के नाम पर पैसा ठगते थे।
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