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वजीरएक्स पर यूपीआई सेवाओं को ब्लॉक करने के आदेश को चुनौती
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नई दिल्ली। क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज प्लेटफॉर्म वजीरएक्स (अर्नव गुलाटी वी) पर यूपीआई सेवाओं को ब्लॉक करने के आदेश को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने याचिका पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) व भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सुनवाई 24 दिसंबर तय की है।
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने एसबीआई, आरबीआई के अलावा नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज को भी नोटिस जारी किया है। पीठ ने यह नोटिस कानून के छात्र अर्नव गुलाटी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है।
याची ने दावा किया कि वजीरएक्स का इस्तेमाल करीब 1 करोड़ लोग करते हैं। याचिका में कहा गया है कि मंच पर यूपीआई भुगतान को अवरुद्ध करना सुप्रीम कोर्ट के मार्च 20 के फैसले के खिलाफ है। फैसले में बैंकों को क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन में सौदा करने की अनुमति दी गई थी। इस तरह का फैसला मई 2021 के आरबीआई के एक सर्कुलर और एनपीसीआई द्वारा जारी अन्य नोटिफिकेशन के खिलाफ भी है जिसमें कहा गया था कि वह क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
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एडवोकेट सिद्धार्थ आचार्य के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि वजीरएक्स के खाते में पैसा जमा करने के लिए यह प्लेटफॉर्म बैंक ट्रांसफर, नेट बैंकिंग, वॉलेट ट्रांसफर, यूपीआई आदि के विकल्प उपलब्ध कराता है। याचिका में कहा गया है कि इससे यूजर्स समय पर क्रिप्टोकरेंसी में व्यापार या निवेश नहीं कर पाएंगे जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा।
याची ने अदालत से एसबीआई को क्रिप्टो एक्सचेंजों पर यूपीआई भुगतान पर रोक लगाने के अपने निर्णय को वापस लेने का निर्देश देने का आग्रह किया है। इसके अलावा आरबीआई को क्रिप्टोकरेंसी क्षेत्र को विनियमित और नियंत्रित करने और भुगतान इंटरफेस के लिए प्रावधान करने का निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने एसबीआई, आरबीआई के अलावा नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) और डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज को भी नोटिस जारी किया है। पीठ ने यह नोटिस कानून के छात्र अर्नव गुलाटी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया है।
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याची ने दावा किया कि वजीरएक्स का इस्तेमाल करीब 1 करोड़ लोग करते हैं। याचिका में कहा गया है कि मंच पर यूपीआई भुगतान को अवरुद्ध करना सुप्रीम कोर्ट के मार्च 20 के फैसले के खिलाफ है। फैसले में बैंकों को क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेनदेन में सौदा करने की अनुमति दी गई थी। इस तरह का फैसला मई 2021 के आरबीआई के एक सर्कुलर और एनपीसीआई द्वारा जारी अन्य नोटिफिकेशन के खिलाफ भी है जिसमें कहा गया था कि वह क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
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एडवोकेट सिद्धार्थ आचार्य के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि वजीरएक्स के खाते में पैसा जमा करने के लिए यह प्लेटफॉर्म बैंक ट्रांसफर, नेट बैंकिंग, वॉलेट ट्रांसफर, यूपीआई आदि के विकल्प उपलब्ध कराता है। याचिका में कहा गया है कि इससे यूजर्स समय पर क्रिप्टोकरेंसी में व्यापार या निवेश नहीं कर पाएंगे जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा।
याची ने अदालत से एसबीआई को क्रिप्टो एक्सचेंजों पर यूपीआई भुगतान पर रोक लगाने के अपने निर्णय को वापस लेने का निर्देश देने का आग्रह किया है। इसके अलावा आरबीआई को क्रिप्टोकरेंसी क्षेत्र को विनियमित और नियंत्रित करने और भुगतान इंटरफेस के लिए प्रावधान करने का निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है।