{"_id":"60b642d1f173415ce4780d4b","slug":"challenge-to-icmr-advisory-regarding-not-getting-infected-again-tested-in-rtpcr-test","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली: आईसीएमआर के आरटीपीसीआर जांच में संक्रमित मिलने वाले को पुन: जांच नहीं करवाने संबंधी परामर्श को चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली: आईसीएमआर के आरटीपीसीआर जांच में संक्रमित मिलने वाले को पुन: जांच नहीं करवाने संबंधी परामर्श को चुनौती
Tue, 01 Jun 2021 07:53 PM IST
सुशील कुमार कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार कुमार
Updated Tue, 01 Jun 2021 07:53 PM IST
सार
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की एक पीठ ने एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए आईसीएमआर को भी नोटिस जारी कर अपना भी पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
कोरोना वायरस: जांच करता स्वास्थ्यकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आरटीपीसीआर जांच में एक बार संक्रमित मिलने वाले व्यक्ति को दोबारा यह जांच नहीं करवाने संबंधी परामर्श को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की एक पीठ ने एक वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए आईसीएमआर को भी नोटिस जारी कर अपना भी पक्ष रखने का निर्देश दिया है। याची अधिवक्ता ने आईसीएमआर के चार मई के परामर्श को चुनौती देते हुए कहा है कि वह और उनके परिजन के पहली बार 28 अप्रैल को संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी और उसके बाद 17 दिनों से ज्यादा समय तक अलग में रहने के बावजूद उनकी दोबारा जांच नहीं हो पा रही है।
विज्ञापन
उन्होंने दलील की कि चार मई को जारी किया गया परामर्श मनमाना, भेदभावपूर्ण और एक विरोधाभासी स्थिति पैदा करता है, क्योंकि केंद्र, आईसीएमआर और दिल्ली सरकार द्वारा जारी कई अन्य अधिसूचनाओं के जरिये एक नेगेटिव आरटीपीसीआर रिपोर्ट को अनिवार्य किया गया है।
विज्ञापन
उन्होंने परामर्श में उस क्लॉज को भी समाप्त करने का अनुरोध किया है, जिसमें रैपिड एंटीजन जांच (आरएटी) या आरटीपीसीआर जांच में संक्रमित पाये गये व्यक्ति द्वारा फिर से आरटीपीसीआर जांच कराये जाने पर रोक लगाई गई है। याचिकाकर्ता ने अपने और अपने परिवार के सदस्यों की फिर से जांच कराने की अनुमति देने का अनुरोध भी किया है।