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दूसरी लहर में सुर्खियों में आया पर अभी तक शुरू नहीं हुआ नजफगढ़ का अस्पताल
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विनोद डबास
नई दिल्ली। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान राजधानी के ग्रामीण इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी सामने आने पर सुर्खियों में आया नजफगढ़ का निर्माणाधीन अस्पताल अभी तक चालू नहीं हुआ है। अब इस अस्पताल की ओर किसी का ध्यान नहीं है, जबकि गत अप्रैल एवं मई माह में इसे इलाके के कुछ नेताओं ने राजनीतिक अखाड़ा बना दिया था।
नजफगढ़ में करीब दो सौ बेड का अस्पताल बनाने की करीब ढाई दशक पहले चर्चा आरंभ हुई थी। यहां वर्ष 2004 से 2019 के दौरान चार बार बुनियाद के पत्थर पर पत्थर रखने के बावजूद अभी तक अस्पताल बनकर तैयार नहीं हुआ है। फिलहाल यहां अस्पताल बनाने का कार्य चल रहा है।
गत अप्रैल एवं मई माह में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गांवों में इलाके में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौत होने पर यह अस्पताल काफी सुर्खियों में आया था। इलाके के कई जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की मौत के लिए दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।
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उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार का यह अस्पताल बनकर तैयार है, मगर दिल्ली सरकार की लापरवाही के कारण यह अस्पताल चालू नहीं हो सका। अन्यथा कोरोना की दूसरी लहर में यहां लोगों का इलाज हो सकता था। उन्होंने कहा था कि दिल्ली सरकार ने चार पेड़ काटने की स्वीकृति नहीं दी। इस कारण अस्पताल में एंबुुलेंस प्रवेश नहीं कर सकती है।
खास बात यह है कि इन चार पड़ों के कारण अस्पताल को चालू करने में कोई दिक्कत नहीं है, बल्कि यहां रास्ता बनाने के लिए करीब 70 पेड़ शिफ्ट होने हैं। निर्माण कार्य कर रही एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली सरकार ने पेड़ शिफ्ट करने की स्वीकृति दे दी है। अभी पेड़ शिफ्ट करने की कवायद आरंभ नहीं हुई है। हालांकि रास्ता बनाना शुरू कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार उन्हें दिसंबर के अंत तक अस्पताल बनाना है। वह दिसंबर माह में अस्पताल का भवन प्रशासन को सौंप देंगे। इसके बाद अस्पताल में फर्नीचर आदि सामान आएगा। तत्पश्चात अस्पताल चालू हो पाएगा। बताया जा रहा है कि अगले साल अप्रैल माह के दौरान होने वाले तीनों नगर निगम के चुनाव की घोषणा होने से पहले इस अस्पताल का जनवरी माह में उद्घाटन किया जाएगा।
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नई दिल्ली। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान राजधानी के ग्रामीण इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी सामने आने पर सुर्खियों में आया नजफगढ़ का निर्माणाधीन अस्पताल अभी तक चालू नहीं हुआ है। अब इस अस्पताल की ओर किसी का ध्यान नहीं है, जबकि गत अप्रैल एवं मई माह में इसे इलाके के कुछ नेताओं ने राजनीतिक अखाड़ा बना दिया था।
नजफगढ़ में करीब दो सौ बेड का अस्पताल बनाने की करीब ढाई दशक पहले चर्चा आरंभ हुई थी। यहां वर्ष 2004 से 2019 के दौरान चार बार बुनियाद के पत्थर पर पत्थर रखने के बावजूद अभी तक अस्पताल बनकर तैयार नहीं हुआ है। फिलहाल यहां अस्पताल बनाने का कार्य चल रहा है।
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गत अप्रैल एवं मई माह में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान गांवों में इलाके में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौत होने पर यह अस्पताल काफी सुर्खियों में आया था। इलाके के कई जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की मौत के लिए दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।
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उन्होंने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार का यह अस्पताल बनकर तैयार है, मगर दिल्ली सरकार की लापरवाही के कारण यह अस्पताल चालू नहीं हो सका। अन्यथा कोरोना की दूसरी लहर में यहां लोगों का इलाज हो सकता था। उन्होंने कहा था कि दिल्ली सरकार ने चार पेड़ काटने की स्वीकृति नहीं दी। इस कारण अस्पताल में एंबुुलेंस प्रवेश नहीं कर सकती है।
खास बात यह है कि इन चार पड़ों के कारण अस्पताल को चालू करने में कोई दिक्कत नहीं है, बल्कि यहां रास्ता बनाने के लिए करीब 70 पेड़ शिफ्ट होने हैं। निर्माण कार्य कर रही एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली सरकार ने पेड़ शिफ्ट करने की स्वीकृति दे दी है। अभी पेड़ शिफ्ट करने की कवायद आरंभ नहीं हुई है। हालांकि रास्ता बनाना शुरू कर दिया है।
अधिकारियों के अनुसार उन्हें दिसंबर के अंत तक अस्पताल बनाना है। वह दिसंबर माह में अस्पताल का भवन प्रशासन को सौंप देंगे। इसके बाद अस्पताल में फर्नीचर आदि सामान आएगा। तत्पश्चात अस्पताल चालू हो पाएगा। बताया जा रहा है कि अगले साल अप्रैल माह के दौरान होने वाले तीनों नगर निगम के चुनाव की घोषणा होने से पहले इस अस्पताल का जनवरी माह में उद्घाटन किया जाएगा।