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भाई ने दी किडनी, सरकार ने दी सुविधा, डॉक्टर ने बचाई जान
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नई दिल्ली। कलाई पर राखी बंधवा कर भाई अपनी बहन की रक्षा करने का प्रण लेते हैं लेकिन दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में एक भाई ऐसा था जिसे इस प्रण को पूरा करने के लिए अपनी किडनी देनी पड़ी। बहन-भाई की गरीबी और इस प्यार को देख डॉक्टर भी भावुक हुए और महिला को दो लाख रुपये के इंजेक्शन फ्री में उपलब्ध कराए।
अस्पताल में कोरोना महामारी के चलते डेढ़ साल से ऑपरेशन थियेटर बंद पड़ा था लेकिन डॉक्टरों ने पहला प्रत्यारोपण इसी बहन का करने का फैसला लिया।
बुधवार को किडनी प्रत्यारोपण सफल होने के बाद मरीज को आईसीयू में निगरानी के लिए रखा गया है। सफदरजंग अस्पताल के डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि दोनों भाई-बहन मूलरूप से बिहार निवासी हैं। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के साथ साथ महामारी के चलते ऑपरेशन न होने की वजह से मरीज का उपचार अब तक नहीं हो पा रहा था।
उन्होंने बताया कि बीते रक्षाबंधन भाई ने अपनी बहन को किडनी देने का फैसला लिया जिसके बाद कागजी कार्यवाही पूरी करते हुए बुधवार को प्रत्यारोपण सफल रहा। 30 वर्षीय बहन को नई जिंदगी मिलने के बाद भाई की आंखों में आंसू छलक उठे। चूंकि प्रत्यारोपण में अक्सर रिजेक्शन का खतरा बना रहता है जिसे कम करने के लिए दो इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। इनकी कीमत करीब एक-एक लाख रुपये है।
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यह इंजेक्शन मरीज को फ्री में लग सके क्योंकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ ही समय पहले यहां इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध कराना शुरू किया है। सफदरजंग अस्पताल में प्रत्यारोपण के लिए कोई शुल्क नहीं लगता है। डॉ. अनूप कुमार का कहना है कि सप्ताह में दो बार किडनी प्रत्यारोपण करने का फैसला लिया है। ताकि मरीजों की लंबी वेटिंग में कमी आ सके।
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अस्पताल में कोरोना महामारी के चलते डेढ़ साल से ऑपरेशन थियेटर बंद पड़ा था लेकिन डॉक्टरों ने पहला प्रत्यारोपण इसी बहन का करने का फैसला लिया।
बुधवार को किडनी प्रत्यारोपण सफल होने के बाद मरीज को आईसीयू में निगरानी के लिए रखा गया है। सफदरजंग अस्पताल के डॉ. अनूप कुमार ने बताया कि दोनों भाई-बहन मूलरूप से बिहार निवासी हैं। आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के साथ साथ महामारी के चलते ऑपरेशन न होने की वजह से मरीज का उपचार अब तक नहीं हो पा रहा था।
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उन्होंने बताया कि बीते रक्षाबंधन भाई ने अपनी बहन को किडनी देने का फैसला लिया जिसके बाद कागजी कार्यवाही पूरी करते हुए बुधवार को प्रत्यारोपण सफल रहा। 30 वर्षीय बहन को नई जिंदगी मिलने के बाद भाई की आंखों में आंसू छलक उठे। चूंकि प्रत्यारोपण में अक्सर रिजेक्शन का खतरा बना रहता है जिसे कम करने के लिए दो इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं। इनकी कीमत करीब एक-एक लाख रुपये है।
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यह इंजेक्शन मरीज को फ्री में लग सके क्योंकि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कुछ ही समय पहले यहां इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध कराना शुरू किया है। सफदरजंग अस्पताल में प्रत्यारोपण के लिए कोई शुल्क नहीं लगता है। डॉ. अनूप कुमार का कहना है कि सप्ताह में दो बार किडनी प्रत्यारोपण करने का फैसला लिया है। ताकि मरीजों की लंबी वेटिंग में कमी आ सके।