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हार्ट अटैक के बाद घर पहुंची बाइक एंबुलेंस ने बचाई जान

Thu, 13 Feb 2020 05:05 AM IST
नोएडा ब्यूरो परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नोएडा ब्यूरो Updated Thu, 13 Feb 2020 05:05 AM IST
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bike ambulace save life
बाइक एंबुलेंस (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

देश में पहली बार हार्ट अटैक के बाद बाइक एंबुलेंस मरीज के घर पहुंचकर उसकी जान बचाई है। दिल्ली के आरके पुरम स्थित सीआरपीएफ कैंप निवासी एक व्यक्ति को हार्ट अटैक आने के बाद मिशन दिल्ली के तहत बाइक एंबुलेंस उसके घर पहुंची और क्लॉट बस्टर दवा देने के बाद एम्स में भर्ती कराया। इस दवा के इस्तेमाल से धमनियों में मौजूद क्लॉट को खोल दिया जाता है ताकि शरीर में रक्त संचार हो सके। फिलहाल मरीज की जान खतरे से बाहर बताई जा रही है। दो दिन पहले आरके पुरम स्थित सीआरपीएफ कैंप निवासी 52 वर्षीय व्यक्ति को सीने में दर्द की शिकायत होने की सूचना बाइक एंबुलेंस को सुबह 10 बजकर 40 मिनट पर मिली।

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इसके बाद एम्स में मौजूद बाइक एंबुलेंस मरीज के घर की ओर दौड़ पड़ी। करीब 10 मिनट बाद बाइक एंबुलेंस मरीज के घर पहुंची और तत्काल ईसीजी जांच के जरिये क्लॉट का पता लगाया गया। इसके बाद स्वास्थ्य कर्मी ने एक क्लॉट बस्टर दवा को इंजेक्शन के जरिये मरीज को लगाया। जिससे मरीज की हालत स्थिर हो गई। इसके बाद दूसरी एंबुलेंस की मदद से मरीज को एम्स के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया। यहां एम्स के वरिष्ठ डॉ. प्रवीण अग्रवाल एवं उनकी टीम ने मरीज का उपचार किया।
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आईसीएमआर की वैज्ञानिक डॉ. चांदनी सुवर्णा ने बताया कि भारत में ऐसा पहली बार है जब हार्ट अटैक के मरीज को घर बैठे उपचार उपलब्ध कराया गया। कई देशों में सफल उपचार के बाद मिशन दिल्ली अभियान में शामिल स्वास्थ्य कर्मचारियों को क्लॉट बस्टर दवा के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया है। इस दवा को देने से पहले स्वास्थ्य कर्मचारी मरीज की कुछ जरूरी जांचें करते हैं जिसे हार्ट में ब्लॉकेज की पुष्टि हो सके। ये जांचें चंद मिनट में हो सके, इसके लिए स्वास्थ्य कर्मचारियों को तमाम आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
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इसके अलावा एम्स में बैठे डॉक्टर को मरीज की वास्तविक स्थिति बताने के लिए कर्मचारियों के पास टेली डायग्नोसिस की सुविधा है। जांच रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर के निर्देश मिलने पर मरीज को यह दवा दी जाती है। कर्मचारियों को उपलब्ध कराए एफआर बैग में पोर्टेबल ईसीजी, डेफीब्रिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, क्लॉट बस्टर दवा और अन्य आपातकालीन स्थिति में इस्तेमाल दवाएं दी गई हैं।


पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर चल रहा है यह अभियान

दरअसल दिल्ली में पिछले एक वर्ष से मिशन दिल्ली अभियान एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चल रहा है। भारतीय आयुुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और दिल्ली एम्स की टीम इस पहल पर काम कर रही है। इसके लिए एम्स में एक आपातकालीन कंट्रोल रूम स्थापित किया है। साथ ही एम्स में बाइक एंबुलेंस को तैनात भी किया है। हेल्पलाइन नंबर 14430 या 1800111044 पर फोन करके मदद ली जा सकती है। ये बाइक एंबुलेंस एम्स और उसके आसपास के करीब पांच किलोमीटर के इलाके को कवर करती हैं।

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