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बाटला हाउस एनकाउंटर: मोबाइल कंपनी के एग्जीक्यूटिव बनकर गए थे एसआई धर्मेन्द्र, कुछ देर में ही बना लिया था घर का नक्शा
Tue, 16 Mar 2021 04:38 AM IST
Vikas Kumar
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 16 Mar 2021 04:38 AM IST
सार
- सात मिनट की कॉल डिकोड हो जाती तो धमाके नहीं होते
- गली में पैर रखने को जगह नहीं थी
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बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान ली गई तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
वर्ष 2008 में सीरियल बम धमाकों से पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक सात मिनट की एक कॉल को रिकॉर्ड किया था। बताया जा रहा है कि स्पेशल सेल इस कॉल को डिकोड नहीं कर पाई थी। अगर ये कॉल डिकोड हो जाती तो दिल्ली में बम धमाके शायद नहीं होती। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जब ये कॉल डिकोड हुई को उसका अंजाम बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ था।
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इस अधिकारी ने बताया कि कॉल को डिकोड करने के बाद स्पेशल सेल की टीम एल-18 बाटला हाउस सुबह-सुबह पहुंच गई थी। 13 सितंबर को उस दिन शनिवार था। टीम में तैनात एसआई धर्मेन्द्र कुमार को मोबाइल कंपनी का एग्जीक्यूटिव बनाकर बाटला हाउस में एनकाउंटर वाले मकान में भेजा गया था।
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धर्मेन्द्र कुमार ने गेट को नोक किया तो एक युवक आया। एसआई बाहर निकले युवक से बात करते हुए पूरे घर का नक्शा अपने मन में बैठा लिया था कि कौन कहां-कहां है। इसके बाद एसआई धर्मेन्द्र कुमार नीचे आ गया। इसके बाद जब टीम ऊपर गई और गेट को नोक किया तो अंदर से गोली चलने लग गई थीं। कहां से गोली चली और कौन चला रहा था किसी को कुछ पता नहीं था।
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एनकाउंटर की खबर दिल्ली में आग की तरह फैल गई थी। एनकाउंटर वाले मकान के नीचे व आसपास की गली में इतनी संख्या में लोग जमा हो गए थे कि पैर रखने को जगह नहीं थी। घायलों को अस्पताल ले जाने में काफी दिक्कते हुई। धार्मिक स्थलों से घोषणा की जाने लगी। हालांकि पुलिस स्थानीय लोगों से कहती रही थी कि कोई बाहर न निकले गोली चल रही हैं। मगर लोग नहीं माने।
सुबह के दस बजते-बजते बाटला हाउस व आसपास के इलाके में भारी संख्या में लोग जमा हो गए थे। एसआई धर्मेन्द्र ने इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा को सहारा देकर होली फैमिली अस्पताल पहुंचा। आठ घंटे इलाज के बाद इंस्पेक्टर मोहनचंद शर्मा ने दम तोड़ दिया था।