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Delhi News: एम्स में 146.5 किलो की महिला की बेरियाट्रिक सर्जरी कर दी नई जिंदगी

Sat, 23 Aug 2025 08:58 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 23 Aug 2025 08:58 PM IST
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Bariatric surgery gave a new life to a 146.5 kg woman in AIIMS
गंभीर ओएसए के कारण सांस लेने में भी हो रही थी दिक्कत, कई अंग नहीं कर रहे थे काम
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। एम्स के डॉक्टरों ने बहुत अधिक मोटापे और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (ओएसए) बीमारी से जूझने वाली 146.5 किलो की 44 वर्षीय महिला को नई जिंदगी दी है। बीमारी के चलते महिला के फेफड़े, लिवर और हार्ट की कार्य क्षमता प्रभावित थी। इसके चलते महिला सीपैप (वेंटिलेटर) की मदद से ऑक्सीजन ले रही थीं। तीन महीने से बेड से पर थीं। एम्स में महिला की वजन घटाने वाली स्लीव गैस्ट्रेक्टोमी (बेरियाट्रिक) सर्जरी की गई।

एम्स सर्जरी विभाग के डॉ. मंजूनाथ मारुति पोल ने बताया कि महिला दिल्ली के संगम विहार इलाके की रहने वाली हैं। पिछले 12 वर्षों से उनका वजन लगातार बढ़ रहा था। आहार और व्यायाम में बदलाव के बावजूद वह तीन वर्षों से वजन कम नहीं कर पा रही थीं। बीते तीन महीने से उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। वह ठीक से सो नहीं पा रही थी।
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मरीज को चार महीने पहले सफदरजंग अस्पताल के श्वसन विभाग में भी भर्ती कराया गया था। ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ महिला को डिस्चार्ज किया गया। महिला को गंभीर स्लीप एपनिया होने के बारे में पता चला। फिर उपचार के लिए डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में रेफर कर दिया गया। इस बीच महिला के फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। महिला को सीपैप(वेंटिलेटर) पर डाल दिया गया। सीपैप हवा के माध्यम से वायुमार्ग को खुला रखने में मदद करता है जिससे व्यक्ति को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सके।
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सर्जरी से पहले आईसीयू में एक महीने चला उपचार

उन्होंने बताया कि जुलाई महीने के मध्य में महिला को जांच और बैरिएट्रिक सर्जरी के लिए एम्स में रेफर किया गया। हालात बिगड़ने पर महिला को आईसीयूमें भर्ती किया गया। चिकित्सीय जांच में पता चला कि महिला को फेफड़ों के काम न करने, राइट हार्ट फेल्योर, क्रोनिक लिवर डिजीज सहित कई दूसरी गंभीर बीमारियां थीं। सीपैप की आवश्यकता को कम किया। अच्छा आहार लेने से करीब महिला का 15 किलोग्राम वजन भी कम हुआ। डॉक्टर ने बताया महिला के पेट के लगभग 80 फीसदी हिस्से को हटा दिया गया। पेट में एक पतली ट्यूब के आकार की थैली रह जाती है। भोजन करने की क्षमता कम होती है। फिर भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन का उत्पादन कम होने लगता है और वजन घटने लगता है।


चुनौतीपूर्ण था सर्जरी

उन्होंने कहा कि महिला की सर्जरी करना काफी चुनौतीपूर्ण था। महिला के पेट की मोटाई 15 सेमी थी जो सीमेंट जैसा लग रहा था। दूरबीन वाले उपकरण चल नहीं पा रहे थे। साथ ही महिला के कई अंगों के काम न करने की वजह से उन्हें एनेस्थीसिया देना भी चुनौती था। एनेस्थीसिया विभाग की डॉ. सुष्मिता और उनकी टीम ने बखूबी इस काम को संभाला। महिला स्वास्थ्यलाभ पर हैं और जल्द डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
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