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आतंकी या दंगा मामले में मुझे फंसाने की कोशिश: जफरुल इस्लाम खान

Thu, 29 Oct 2020 10:42 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2020 10:42 PM IST
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authorities are trying to implicate me in terror funding case
नई दिल्ली। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष जफरुल-इस्लाम खान ने कहा कि उनका कश्मीरी आतंकवादियों के साथ कोई ताल्लुक नहीं है। बावजूद इसके डर है कि आतंकी या दंगा मामले में फंसाया जा सकता है। पूर्व अध्यक्ष की यह टिप्पणी उस वक्त आई है कि जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने आतंकी फंडिंग मामले में उनके घर और कार्यालय पर 7 से 11 बजे छापे मारे।
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ट्वीट में खान ने कहा कि उनके कार्य स्थल और घर पर छापे मारने के आदेश उच्च स्तर से दिए गए थे। एनआईए अधिकारियों ने भी इस मामले में धैर्य नहीं रखा और उनके घर पर कार्रवाई की गई। खान ने कहा कि मेरा कश्मीरी आतंकवादियों के साथ कोई संबंध या संपर्क नहीं है। कई वर्षों से कश्मीर का दौरा भी नहीं किया है।
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उन्होंने कहा एनआईए अधिकारियों का कहना था कि छापे के आदेश ऊपर से आए हैं। एनआईए अधिकारियों ने मुझे अपने मोबाइल पर एक आदेश दिखाया। इसे एक अधिकारी (यादव) ने जारी किया था। इसमें मेरी एनजीओ को कश्मीर के आतंकी मामले से जोड़ने के लिए छापे मारी के आदेश थे। वह दीवार फांदकर घर में दाखिल हुए, जैसा चिदंबरम के साथ किया था। चार घंटे की छापे मारी के बाद कागजात, लैपटॉप, हार्ड डिस्क और नकदी भी ले गए।
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एनआईए जम्मू-कश्मीर सहित दूसरे राज्यों में सक्रिय और गैर सरकारी संगठनों की जांच कर रही है। बृहस्पतिवार को इसी सिलसिले में कुछ और संगठनों पर नए सिरे से छापे मारे गए। इनके तार कथित रूप से आतंकी फंडिंग से जुड़े बताए जा रहे हैं। एनआईए की कई टीमों ने महानिरीक्षक की निगरानी में लगातार दूसरे दिन नौ जगहों पर सर्च किया। इसमें गैर सरकारी संगइन चैरिटी अलायंस भी है, जिसके प्रमुख खान हैं।

आईपीसी और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत आठ अक्तूबर को दर्ज एक मामले के बाद छापे मारी की गई। सूत्रों के मुताबिक कुछ गैर सरकारी संगठनों और ट्रस्ट के जरिये दान और कारोबार में योगदान के नाम पर धन एकत्रित किया जा रहा है जिसका इस्तेमाल जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
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