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Delhi: वाहन से होने वाले प्रदूषण पर विधानसभा सख्त, परिवहन मंत्री और आयुक्त को भेजा पत्र, मांगा हिसाब-किताब
Tue, 21 Apr 2026 06:12 AM IST
Digvijay Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Digvijay Singh
Updated Tue, 21 Apr 2026 06:12 AM IST
सार
दिल्ली में वाहन प्रदूषण पर विधानसभा ने सख्त रुख अपनाया है। लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त को पत्र भेजकर जरूरी कार्रवाई करने को कहा है।
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विजेंद्र गुप्ता, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
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विस्तार
दिल्ली में वाहन प्रदूषण पर विधानसभा ने सख्त रुख अपनाया है। लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने परिवहन मंत्री और परिवहन आयुक्त को पत्र भेजकर जरूरी कार्रवाई करने को कहा है। विभागों से 31 दिसंबर 2026 तक किए गए काम का ब्योरा मांगा गया है, जिसे 31 जनवरी 2027 तक विधानसभा सचिवालय में जमा करना होगा।
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दिल्ली में वाहन जनित वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण विषय पर आधारित नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट और लोक लेखा समिति (पीएसी) की तीसरी रिपोर्ट अब संबंधित विभागों को भेज दी गई है। दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में परिवहन मंत्री, दिल्ली सरकार और परिवहन विभाग के सचिव सह आयुक्त को औपचारिक पत्र भेजा है। इसमें समिति की सिफारिशों पर समय पर कार्रवाई करने और प्रगति रिपोर्ट देने को कहा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, विभागों को 31 दिसंबर तक किए गए काम की स्थिति स्पष्ट करनी होगी और 31 जनवरी तक कार्रवाई रिपोर्ट विधानसभा सचिवालय को सौंपनी होगी।
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विधानसभा अध्यक्ष ने रिपोर्ट पर जताई चिंता
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि वाहन प्रदूषण से निपटने के लिए सिर्फ छोटे कदम काफी नहीं हैं। इसके लिए सभी विभागों को मिलकर और तय समय सीमा में काम करना होगा। ऑडिट रिपोर्ट में कई ऐसी खामियां सामने आई हैं, जिन्हें अब दूर करना जरूरी है। रिपोर्ट में वायु गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था की कमियों पर चिंता जताई गई है। बताया गया कि कई जगह पर्याप्त मॉनिटरिंग स्टेशन नहीं हैं, सभी जरूरी प्रदूषकों की नियमित जांच नहीं हो रही और भरोसेमंद उत्सर्जन डेटा की कमी है। इससे सही नीति बनाने में दिक्कत आती है। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में बसों की कमी, सीमित रूट कवरेज, कमजोर लास्ट माइल कनेक्टिविटी और रूट सुधार योजनाओं में देरी के कारण लोग निजी वाहनों पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। इसका सीधा असर ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों पर पड़ता है। वाहनों की जांच व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। पीयूसी केंद्रों की सीमित उपलब्धता, प्रमाणपत्र जारी करने में गड़बड़ी, उत्सर्जन जांच की कमजोर निगरानी और नई तकनीक के धीमे इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है। इसके अलावा पुराने वाहनों की बड़ी संख्या और उन्हें हटाने या स्क्रैप करने की धीमी प्रक्रिया को भी चिंता का कारण बताया गया है।
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रिपोर्ट में बेहतरी के भी विकल्प
रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, चार्जिंग स्टेशन बढ़ाने और उत्सर्जन जांच व्यवस्था मजबूत करने जैसे कदमों का जिक्र भी किया गया है। लेकिन कहा गया कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी से इन योजनाओं का असर सीमित रहा। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली को वाहन प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए मजबूत निगरानी, नियमों का सख्त पालन, सार्वजनिक परिवहन का विस्तार, स्वच्छ वाहनों को बढ़ावा और बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन जरूरी है। उन्होंने सभी विभागों से अपील की कि समिति की सिफारिशों पर तेजी से काम करें, ताकि दिल्ली की हवा सुधारने की दिशा में ठोस परिणाम सामने आ सकें।