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जम्मू-कश्मीर के इतिहास में गुम हुईं 13 सशक्त स्त्रियों को पुनर्जीवित कर रही फिल्म ‘स्त्रीदेश’

Thu, 11 Mar 2021 05:34 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Thu, 11 Mar 2021 05:34 PM IST
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Ashish kaul movie The Forgotten Women of jammu Kashmir stridesh tells story about of 13 empower women
स्त्रीदेश: द फॉरगॉटन वुमन ऑफ कश्मीर के प्रीमियर के लिए दीप प्रज्ज्वलित करते सच्चिदानंद जोशी, सुषमा जत्तू, शरद दत्त आदि। - फोटो : अमर उजाला
आशीष कॉल की स्त्रीदेश: द फॉरगॉटन वुमन ऑफ कश्मीर, पहली रिसर्च आधारित फिल्म मानी जा रही है, जिसने अविभाजित जम्मू और कश्मीर की 13 सशक्त स्त्रियों की कहानी को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की है। उस समय के कश्मीर के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सैन्य ताकत को बढ़ाने में इन स्त्रियों की कितनी बड़ी हिस्सेदारी रही है। स्त्रीदेश उनके ऐसे ही योगदान और कश्मीर के भुला दिए गए इतिहास पर रौशनी डालती है। 
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महिला दिवस के मौके पर इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स में फिल्म का प्रीमियर रखा गया था। प्रीमियर की अध्यक्षता जाने-माने शिक्षाविद और आईजीएनसीए के मेंबर सेक्रेट्री डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की। आईजीएनसीए की तरफ से इस प्रोजेक्ट की डायरेक्टर डॉ. सुषमा जत्तू, दूरदर्शन के शरद दत्त और दिल्ली यूनिवर्सिटी के डॉ. कुमुद शर्मा सहित कई हस्तियों ने इस प्रीमियर में शिरकत की।
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इन स्त्रियों की उपलब्धियां को जरूर जानना चाहिए
निर्देशक आशीष कॉल ने फिल्म के बारे में बताया कि इस फिल्म को पेश करते हुए मुझे ऐसा लगा कि मैं इन 13 सशक्त स्त्रियों के पिता की तरह हूं। जिन्हें अपने ही देश में भुला दिया गया और मैं उन्हें इतिहास के पन्नों से निकालकर वर्तमान में लेकर आया हूं। इन सभी स्त्रियों के अद्भुत कार्यों और उपलब्धियों के बारे में दुनिया को जरूर जानना चाहिए। चाहे वो दुनिया का पहला राशन का पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम हो, दुनिया का पहला पब्लिक बैंकिग सिस्टम, पहला कमांडो फोर्स या पहली काउंटर इंटेलिजेंस प्रणाली। गोरिल्ला युद्ध तकनीक, संसदीय व्यवस्था से लेकर टैक्स रीफॉर्म तक, ये सब जम्मू-कश्मीर की इन सशक्त स्त्रियों की ही देन है। 
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कश्मीर के पांच हजार साल के इतिहास पर रौशनी डालता है स्त्रीदेश
कभी इतिहासकारों की चूक तो कभी उनके और तमाम सरकारों के षडयंत्र ने इनके सशक्त इतिहास को छुपाया। इन स्त्रियों की कहानी आज महिलाओं के लिए न सिर्फ प्रेरणा का स्त्रोत होती, बल्कि समाज में महिलाओं की हिस्सेदारी और स्थिति को बेहतर बनाने में एक बड़ा योगदान दे सकती थी। फिल्म के निर्माता डॉ. सच्चिदानंद जोशी हैं। इसे जम्मू-कश्मीर, पुंछ और राजौरी में कई ऐतिहासिक जगहों पर शूट किया गया है। आशीष कॉल ने निर्देशन के साथ ही स्क्रिप्टिंग, सिनेमेटोग्राफी और प्रोडक्शन की जिम्मेदारी उठाई है। इसी के साथ स्त्रीदेश ऐसा पहला रिसर्च आधारित ऐतिहासिक डॉक्यूमेंट हैं, जो पांचवी शताब्दी ईसा पूर्व  से 11वीं शताब्दी ईसा पश्चात तक के समय को इन सशक्त स्त्रियों की कहानी के माध्यन से सामने लाता है। कश्मीर के पांच हजार साल के इतिहास पर रौशनी डालता है।


कॉल आगे बताते हैं इस प्रोजेक्ट पर काम करते हुए और कश्मीर के इतिहास के अनछुए पहलुओं की जड़ तक पहुंचाने के लिए पिछले छह साल में उन्हें दुनिया की कई अद्भुत और चुनौती भरी जगहों पर जाने का मौका मिला। एक फिल्म और 13 महिलाओं के जीवन के रीसर्च डॉक्यूमेंट के साथ ही स्त्रीदेश प्रोजेक्ट में इन 13 स्त्रियों की कहानी पर आधारित 13 स्वतंत्र किताबें भी शामिल हैं। इस कड़ी में पहली किताब दिद्दा- दी वॉरियर क्वीन ऑफ कश्मीर का लोकार्पण सुपरस्टार अमिताभ बच्चन द्वारा किया जा चुका है।
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