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दिल्ली : वाह! क्या मास्टर स्ट्रोक है, सीएम केजरीवाल ने कृषि कानून को लेकर भाजपा पर कसा तंज, किसानों की जीत पर पास किया संकल्प  

Fri, 26 Nov 2021 11:54 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Fri, 26 Nov 2021 11:54 PM IST
सार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों और जनता से पूछे बिना अपने अहंकार में तीन काले कानून पास किए थे। वहीं सरकार को लग रहा था कि किसाने आएंगे, थोड़े दिन आंदोलन करेंगे, चीखेंगे, चिल्लाएंगे और फिर घर चले जाएंगे।

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arvind kejriwal attack on bjp on victory of farmers movement passed a resolution in special session of Legislative Assembly
अरविंद केजरीवाल - फोटो : वीडियो ग्रैब

विस्तार

दिल्ली विधानसभा में किसान आंदोलन की जीत पर शुक्रवार को संकल्प पास किया। इस दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री को हटाने, मृतक किसानों के परिजनों को मुआवजा देने, एमएसपी कानून बनाने व किसानों पर दर्ज मामले वापस लेने की मांग की गई, आंदोलनकारी किसानों की उपेक्षा करने और किसानों पर आरोप लगाने के मामले में प्रधामंत्री एवं कई केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा नेताओं की निंदा की। सदन में भाजपा विधायकों ने केंद्र सरकार को किसानों का हितैषी बताया। दिल्ली सरकार ने संकल्प पास करने के लिए विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया था।
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विधानसभा के विशेष सत्र में मंत्री गोपाल राय ने संकल्प प्रस्तुत किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन ने केंद्र सरकार का घमंड तोड़ने का कार्य किया है। सरकार ने किसान आंदोलन को कुचलने के लिए किसानों को राष्ट्र विरोधी, खालिस्तानी, चीन-पाकिस्तान के एजेंट करार दिया था। इसके अलावा किसानों पर लाठी चलवाई और गाड़ी पर चढ़ा दी गई, लेकिन किसानों ने हिम्मत नहीं हारी और उन्होंने सरकार को काले कृषि कानून वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने किसानों की एमएसपी समेत अन्य लंबित मांगों का समर्थन करते हुए पूरा करने की मांग की।
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किसानों को दी गईं गालियां, पलट कर कभी नहीं दिया जवाब
उधर, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों और जनता से पूछे बिना अपने अहंकार में तीन काले कानून पास किए थे। वहीं सरकार को लग रहा था कि किसाने आएंगे, थोड़े दिन आंदोलन करेंगे, चीखेंगे, चिल्लाएंगे और फिर घर चले जाएंगे। पिछले साल 26 नवंबर को दिल्ली के बॉर्डर पर यह आंदोलन शुरू हुआ। इस एक साल के दौरान किसानों को गालियां दी गईं और उन्हें राष्ट्र विरोधी कहा गया। कभी सोचा नहीं था कि आजाद भारत में एक ऐसा दिन आएगा, जब अपने किसानों को इतनी गंदी-गंदी गालियां दी जाएंगी, लेकिन किसानों ने पलट कर इनका जवाब नहीं दिया। इनके साथ हिंसा की गई, लेकिन सरकार किसानों की हिम्मत नहीं तोड़ पाई और आखिर में सरकार को किसानों के आगे झुकना पड़ा।
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सब लोगों ने अपनी तरफ से एक चम्मच घी डाला
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक तरह से हवन था और उस हवन में हम सब लोगों ने भी अपनी तरफ से एक चम्मच घी डाला, जब हमारे पास किसानों के लिए स्टेडियम को जेल बनाने की फाइल आई तो तब मुझे अन्ना आंदोलन के अपने दिन याद आ गए। वह समझ गए कि ये सभी किसानों को इन स्टेडियम के अंदर डाल देंगे और आंदोलन खत्म हो जाएगा। हमने स्टेडियम को जेल बनाने की अपनी मंजूरी नहीं दी। बॉर्डर पर किसानों हर समय मदद की।

भाजपाइयों ने हद कर दी
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कृषि कानून लागू करने और उन्हें रद्द करने के मामले में भाजपाइयों ने तर्क देने में हद कर दी। जब ये तीन कानून लाए गए, तब भाजपा वाले चारों तरफ बोले, वाह! क्या मास्टर स्ट्रोक है और जब ये तीनों कानून वापस लिए गए, तब भी बोले, वाह! क्या मास्टर स्ट्रोक है, क्या गत बना दी है, भाजपा ने अपने नेताओं की।

किसान आंदोलन लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय बनकर आया : सिसोदिया
विधानसभा में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि निरंकुश सत्ता के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन कर अपनी बात मनवाई जा सकती है। किसानों ने आने वाली पीढ़ी के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। किसानों ने यह सिद्ध कर दिया कि जब सत्ता में बैठे लोगों को अहंकार हो जाए और वो चंद लोगों के फायदे के लिए देश के आम आदमी को कुचलने का प्रयास करें तो शांतिपूर्ण आंदोलन के माध्यम से उस निरंकुश सत्ता को झुकाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन देश के लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय बनकर आया है। किसानों ने आरोपों, अत्याचारों और षडयंत्रों के बावजूद धैर्य के साथ आंदोलन चलाया और जीत हासिल की। केंद्र सरकार ने किसान आंदोलन को खत्म करने के लिए 100 करोड़ का बजट लगा दिया।


केंद्र सरकार पूरी तरह किसान हितैषी : बिधूड़ी
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामबीर सिंह बिधूड़ी ने सदन में आप विधायकों के तर्क को नकारते हुए केंद्र सरकार को किसान हितैषी ठहराने के लिए अनेक तर्क दिए। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन में कृषि उत्पादन, फसलों के दामों और फसलों की खरीद में चौतरफा बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री को किसानों व गरीबों की चिंता है। इन वर्गों से संबंधित केंद्र सरकार की योजनाएं दिल्ली में भी लागू होनी चाहिए। उन्होंने आप सरकार से आग्रह किया कि वह किसानों के साथ किए गए वादों को पूरा करें, क्योंकि सरकार से दिल्ली के किसान नाराज है और उन्होंने किसान आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया, वहीं भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने किसानों की जान लेने जैसी गतिविधियों को अंजाम नहीं दिया, जबकि पहले कई बार किसानों पर गोली चल चुकी है। हालांकि उनके इस तर्क का आप के कई विधायकों ने अपने संबोधन में विरोध किया।
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