फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Artifact from junk bullet made cheap ride by a school boy of delhi

कबाड़ से जुगाड़ : कोरोना काल में किया कमाल, छात्र ने रॉयल इनफील्ड को बना दिया ई-बाइक

Sat, 11 Sep 2021 04:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा रश्मि शर्मा, नई दिल्ली 
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली  Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 11 Sep 2021 04:05 AM IST
सार

सरकारी स्कूल के नौवीं कक्षा के छात्र ने 45 हजार रुपये में बनाई ई-बाइक।10 हजार रुपये में खरीदा था पुरानी रॉयल इनफील्ड बाइक का ढांचा। एक बार चार्ज करने पर 100 किलोमीटर चलने का दावा।

विज्ञापन
Artifact from junk bullet made cheap ride by a school boy of delhi
ई-बाइक के साथ राजन... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले नौवीं कक्षा के एक छात्र ने कबाड़ के कलपुर्जों के साथ कलाकारी कर ई-बुलेट बना डाली। महज 15 साल की उम्र में उसने यह कमाल कर सभी को हैरान कर दिया है। करीब 45 हजार रुपये खर्च कर छात्र ने रॉयल इनफील्ड बाइक को ई-बाइक में बदला है, जो एक बार चार्ज करने पर 100 किलोमीटर तक चलेगी। खास बात यह है कि अपना मिशन पूरा करने के दौरान छात्र ने घर में बताया था कि उसे स्कूल से प्रोजेक्ट मिला है, जिसे उसे पूरा करना है। हालांकि, इससे पहले 2020 में साइकिल में बैटरी लगाने की उसकी कोशिश सफल नहीं हो सकी थी।

विज्ञापन


सुभाष नगर स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय के छात्र राजन को कलपुर्जों में काफी रुचि है। राजन के अनुसार, पहले लॉकडाउन में ई-साइकिल से प्रयोग शुरू किया, जो सफल नहीं रहा। उस वक्त वह साइकिल की स्पीड को नियंत्रित नहीं कर पाए। पहली बार ई-साइकिल की सवारी करते वक्त वह गिरकर बेहोश हो गए और चोट भी लगी। तब राजन के पिता दशरथ शर्मा ने उन्हें डांटकर ऐसा करने से मना कर दिया। कुछ दिन के लिए राजन ने ई-बाइक बनाने की रुचि को मन में दबा दिया। फिर उन्होंने घर में झूठ बोला कि उन्हें स्कूल से ई-बाइक बनाने का प्रोजेक्ट मिला है।
विज्ञापन


निजी कंपनी में काम करने वाले दशरथ शर्मा ने बताया कि राजन ने उन्हें बताया कि प्रोजेक्ट मिला है। तब उन्होंने उसकी मदद करने की सोची कि स्कूल का काम है। राजन ने उनसे कहा कि कोई पुरानी रॉयल एनफील्ड चाहिए। इसके बाद खोज शुरू हुई, लेकिन चेचिस नंबर के कारण इनफील्ड मिलने में परेशानी आ रही थी। काफी तलाश करने के बाद मायापुरी कबाड़ मार्केट से वह उन्हें 10 हजार रुपये में मिल गई। राजन ने बाइक तीन दिन में बनाई, लेकिन सामान एकत्र करने में उन्हें करीब एक माह लग गया। इस दौरान वह गूगल और यूट्यूब के माध्यम से ई-बाइक के बारेे में जानकारी लेते रहे। आसपास में बाइक ठीक करने वालों और वेल्डिंग करने वालों के पास बैठ कर चीजें देखते समझते रहे। 
विज्ञापन
विज्ञापन


औसतन 40 किमी प्रतिघंटा की है चाल
बाइक मिलने के बाद बैटरी मिलने में भी काफी समस्या आई। जैसे-तैसे फरीदाबाद से 13,500 रुपये में बैटरी खरीदी। इस पर एक साल की वारंटी मिली। इसमें 24 वॉल्ट का चार्जर लगाया गया है, जिसे घर पर ही चार्ज किया जा सकता है। ई-बाइक की स्पीड 40 किलोमीटर प्रतिघंटा है, हाइवे पर इसकी स्पीड बढ़ जाती है। बाइक चलाने पर बैटरी गिर ना जाए, इसके लिए उसके बाहर लकड़ी का बॉक्स लगाया गया है। बाइक के प्रति राजन के जुनून को देखते हुए लगा कि बेटा कुछ कमाल ही करेगा। तीन भाइयों में सबसे बड़े राजन पढ़ने में भी काफी अच्छे हैं। आठवीं में उन्हें 84 फीसदी अंक प्राप्त हुए हैं।
- दशरथ, राजन के पिता

राजन ने बताया था कि वह ई-बाइक बनाना चाहता है। मुझे भी आइडिया अच्छा लगा तो मैंने उसे प्रोत्साहित करना शुरू किया। सबसे बड़ी बात यह है कि लॉकडाउन और साधन कम होने के बावजूद उसने यह कमाल किया है। अब राजन की ई-कार बनाने की इच्छा है।

- रोहित द्विवेदी, छात्र के क्लास टीचर

बच्चे ने सीमित साधनों के बावजूद यह कमाल किया है। अब हमारा प्रयास है कि उसे आगे भी प्रोत्साहन मिले। वह पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी अच्छा है।
- जोगिन्दर अरोड़ा, स्कूल प्रमुख

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed